सुनीता और कल्पना को सामने करके चुनावी समर जीत पायेगा विपक्ष?

2014 के लोकसभा चुनाव का यह दौर दौरा सभी को याद होगा ही। जब अन्ना हजारे रामलीला मैदान पर भ्रष्टाचार को लेकर अनशन कर रहे थे। देश के अन्य राजनीतिक दल और युवाओं ने इसे अपना आन्दोलन बना लिया था। उसी समय केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी का उदय हुआ था। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जंग करते हुए नये प्रकार की राजनीति का वादा करके अन्ना की सहमति के बिना राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनावी समर में केजरीवाल कूछ गये थे।

सुरेश शर्मा, भोपाल। 2014 के लोकसभा चुनाव का यह दौर दौरा सभी को याद होगा ही। जब अन्ना हजारे रामलीला मैदान पर भ्रष्टाचार को लेकर अनशन कर रहे थे। देश के अन्य राजनीतिक दल और युवाओं ने इसे अपना आन्दोलन बना लिया था। उसी समय केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी का उदय हुआ था। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जंग करते हुए नये प्रकार की राजनीति का वादा करके अन्ना की सहमति के बिना राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनावी समर में केजरीवाल कूछ गये थे। आज भ्रष्टाचार के आरोपों में केजरीवाल जेल में हैं आैर उस समय की आरोपी कांग्रेस के नेताओं समेत अन्य विरोधी दल के नेता भ्रष्टाचार के पक्ष में रामलीला मैदान में सभा कर रहे हैं? कांग्रेस की भूमिका में तब भी भ्रष्टाचार हिस्से आया था और आज भी वह पक्ष में ही खड़ी है। सवाल यह है िक विपक्षी नेतृत्व हेमंत की पत्नी कल्पना और अरविंद की पत्नी सुनीता को सामने करके 2024 का चुनावी समर जीत पायेंगे?

झारखंड के मुख्यमंत्री रहते हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गये थे। दसवें नोटिस में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वे आज जेल में हैं। उनके पिता शिबु सोरेन भी नरसिंह राव सरकार के बचाने के समय बदले में घूस लेने के आरोप में आरोपी रहे थे। अब वहां चंपई सोरेन की सरकार है। हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन दिल्ली की रैली में मंचासीन थीं। कमोवेश यही स्थिति दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हुई नो नोटिस तक उन्हें गैर कानूनी बताने वाले केजरीवाल को भी दसवें नोटिस के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। वे भी अब तिहाड़ जेल में स्थापित हो गये। उनकी पत्नी सुनीता अब मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं। इन्हीं को सामने करने का निर्णय भी विपक्ष ने कर लिया है।

केजरीवाल को जेल जाने के बाद दिल्ली ने रामलीला मैदान में एक बड़ा जमावड़ा किया। इसमें सबसे बड़ी राजनीतिक घटना ही यही हुई कि सुनीता केजरीवाल और कल्पना सोरेन को विपक्षी नेताओं ने सामने करके चुनावी समर में जाने का आगाज किया। हालांकि अन्ना हजारे कांग्रेस की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के साथ आन्दोलन रामलीला मैदान पर 2014 में किया था। अब कांग्रेस केजरीवाल के भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने पर उसी रामलीला मैदान में पहुंची। दोनों ही समय कांग्रेस की भूमिका में कोई अन्तर नहीं आया है। वह तो भ्रष्टाचार की मददगार पार्टी ही बनी हुई है।

दिल्ली की रैली का कोई असर होगा या कितना होगा इसका पता तत्काल नहीं चल पायेगा। अभी तक विपक्षी नेतागण सरकार को घेरने का कोई भी उपक्रम नहीं कर पाये हैं। लेकिन इतना जरूर लग रहा है कि जनता के सामने रोना लेकर जा रहे हैं। मोदी उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में फंसाने का काम कर रहे हैं। जनता में नेरटिव क्या बन रहा है यह भी समय की गर्त में हैं। लेकिन विपक्ष उलझा हुआ है शयह जरूर सामने आता जा रहा है।

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