2014 के बाद देश सभी क्षेत्रों में बदला है तब… इतना नकारात्मक क्यों है विपक्ष?

जब से भारत सरकार की कमान नरेन्द्र मोदी के हाथ में आई है तब से सरकार ने सभी क्षेत्रों में काम किया है। आर्थिक सुधार से लगाकर गरीब कल्याण के ऐसे काम हुए हैं जिसका प्रभाव आम आदमी तक दिखाई दे रहा है।

सुरेश शर्मा । जब से भारत सरकार की कमान नरेन्द्र मोदी के हाथ में आई है तब से सरकार ने सभी क्षेत्रों में काम किया है। आर्थिक सुधार से लगाकर गरीब कल्याण के ऐसे काम हुए हैं जिसका प्रभाव आम आदमी तक दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार रहित सरकार के साथ भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्यवाही राजनीतिक पक्ष पर भी हो रही है यह बड़ा पक्ष है। देश की आंतरिक सुरक्षा की बात हो या फिर विदेशों में भारत की धाक का सवाल हो भारत ने अपना डंका बजाया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इसके बाद विपक्ष इतना नकरात्मक क्यों बना हुआ है? सरकार के काम की तत्काल आलोचना करना और काम के प्रभाव और श्रेय को समाप्त करने की नीति के तहत काम करना विपक्ष की आदत बनती जा रही है। जबकि आम व्यक्ति को सुविधा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति में वह सरकार के प्रति नाराज नहीं दिख रहा है। विपक्षी दल मंहगाई और बेरोजगारी को लेकर जनता मे आक्रोश पैदा तो करना चाहते हैं लेकिन उनका जनता के बीच असर लगातार कम होने के कारण जनाक्रोश पैदा नहीं हो पाता है। इससे विपक्षी दलों में निराशा है और वे देश में नकारात्कम भाव पैदा कर रहे हैं। विपक्षी दलों का गठबधन और एक प्रत्याशी तक का सफर भी भाजपा को परेशानी पैदा करता हआ दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि जिस प्रकार का वातावरण देश मे आने वाले चुनावों का दिखाई दे रहा है उससे विपक्षी नेता भी यह मान रहे हैं कि मोदी की फिर वापसी हो सकती है। भारत की सरकार की बात करते हैं तब कुछ क्षेत्रों में विरोध दिखाई देता है।

लेकिन यह विरोध समस्या के समाधान मे हुए किसी विलंब के कारण न होकर राजनीतिक कारणों से है। पंजाब के किसान एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की मांग पर आन्दोलित है। लेकिन सरकार का दावा है कि उसने एमएसपी की राशि में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। किसानों के उत्पाद का भुगतान करने में तेजी आई है। पूर्व की सरकारो की तुलना में इस समय भुगतान का समय घटा है। पूरे देश का किसान केन्द्र की राहत के कारण सुविधा महसूस कर रहा है। ऐसे मे पंजाब के किसान आन्दोलन करने आते है तब विरोध शुरू हो चुका है। किसान ही आन्दोलन का विरोध कर रहे है। हरियाणा का किसान समर्थन में नहीं आया है। यही हाल यूपी के किसानों का है। इसलिए विरोध राजनीतिक है और उसका राजनीतिक जवाब भी दिया जा रहा है। किसानों के प्रति मोदी सरकार का अधिक ध्यान है। विपक्षी दल खास कर कांग्रेस सरकार में रहती है तब स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट का ध्यान भी नही करती है और विपक्ष में है तब गारंटी कानून का वादा करती है। यह नकारात्मकता है। सरकार ने कछ योजनाएं बनाई हैं। लेकिन उन योजनाओं के बारे मे भ्रम पैदा किया गया। अग्रिपथ योजना की जिस प्रकार से विपक्ष ने व्याख्या की वह गलत थी। सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण के साथ रोजगार का रास्ता खोला था लेकिन योजना शुरू होते ही दंगा और आगजनी शुरू हो गई। मतलब विपक्ष व कछ लोग इसके लिए पहले से तैयार थे? यह नकारात्मकता विपक्ष पैदा कर रहा है। मेक इन इंडिया लांच किया गया तब उसकी मजाक बनाई गई लेकिन अब उसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।

भारत निर्यात के मामले में आगे आया है। देश मे उत्पादन अधिक होने से रोजगार के अवसर बन रहे हंै। स्वरोजगार के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है। विपक्ष आज भी प्रधानमंत्री का हवाला देकर दो करोड़ रोजगार की बात करता है और सरकार को घेरने का प्रयास करता है। लेकिन आम व्यक्ति को इस प्रकार की बातों से कोई खास लेना-देना नहीं है। उसका मानना है जब अर्थव्यवस्था का उछाल आता है तब महंगाई तो होती है लेकिन आय के साधन बढ़ते हैं और रोजगार मिलने से आम आदमी की आय में बढ़ोतरी होती है। यह वही दौर है। विपक्ष इस प्रगति को हजम नहीं कर पा रहा है और विरोध करने के लिए विरोध कर रहा है। मोदी सरकार के पास अपने काम बताने के लिए बहुत कुछ है। अपने घोषणा पत्र के माध्यम से किये गये पुराने और नये वादों को पूरा किया गया है। जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का कश्मीर पर लगी धारा 370 को समाप्त करने का वादा पूरा किया गया। तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं के माध्यम से तुष्टिकरण पर चोट की गई। राम मंदिर का निर्माण कराकर सांस्कृतिक प्रभाव को विश्व के सामने रखा गया है। इससे धार्मिक पर्यटन की संभावना से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। व्यक्ति की आय और संसाधनों में बढ़ोतरी से आर्थिक सुधारों को गति मिलेगी। इसलिए देश लगातार आगे बढ़ रहा है। अमित शाह देश भर के प्रवास के समय मोदी सरकार की उपलब्धियों को बाते हैं तब ऐसा लगता है कि वे कितने काम गिना रहे हैं। लोगों में विश्वास पैदा होता है। सरकार काम कर रही है। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में किये जा रहे कामों से विपक्ष मे निराशा का भाव पैदा हो रहा है। इसका प्रभाव ही नकारात्मकता को जन्म दे रहा है।

अब तो स्थिति यह हो गई है कि मोदी सरकार कोई काम करती है? कोई नई योजना लेकर आती है। कोई भी नया कानून आता है तब विपक्ष विरोध और भ्र्रम की राजनीति करने लग जाता है। इससे देश में जनमानस को यह लगता है कि सरकार के काम तो सामने हैं लेकिन विपक्ष इस प्रकार का विरोध क्यों करता है? भारत के बारे में समूचे विश्व मे एक अलग ही भाव बनता जा रहा है। भारत को ताकतवर देश माना जा रहा है। कूटनीतिक मामलोंं में देश का अभी कोई मकाबला नहीं कर पा रहा है। भारत के सुझावों को पूरा विश्व सुनता है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री की बातों को विपक्ष नकारात्मक रूप से पेश करने का प्रयास करता है। हालांकि इस नकारात्मकता का कोई खास प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। विपक्ष का अधिक नकारात्मक होने का कारण यह भी समझा जा रहा है कि भ्र्रष्टाचार के मामले में मोदी सरकार की नीति विपक्ष के गले नहीं उतर रही है। न केवल पुराने मामले खोले जा रहे हैं अपितु विपक्ष के नेताओं की फाइलों को खोला जा रहा है। झारखंड के मख्यमंत्री हेमंत सोरेन जेल में हैं। वे आदिवासी होने का अतिरिक्त लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे लेकिन उस प्रकार की राजनीति का कोई प्रभाव नहीं बन पाया है। राजग के अध्यक्ष लालू यादव जेल में रहे हैं और अब उनकी पत्नी और बेटा ईडी के समन का सामना कर रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी ईडी सात समन दे चुका है। न्यायालय ने उन्हें हाजिर होने के लिए बला लिया है। हो सकता है कि वह केजरीवाल को भी हिरासत मे लेने का आदेश दे दे और दूसरा सीएम हटकर जेल की हवा खाने लग जाये। देश में बदलाव हो रहा है और इस बदलाव का प्रभाव विपक्षी दलों में भी दिखाइ देने लग गया है। विपक्षी दलों ने गठबंधन बनाया और एक साथ चुनाव लडऩे का निर्णय लिया है। डर का आलम यह है कि अपने प्रभाव की सीटें छोड़कर समझौते किये जा रहे हंै। दिल्ली में आप सीट छोड़ रहा है और गुजरात, मध्यप्रदेश और हरियाणा में कांग्रेस आप के लिए सीटें छोड़ रहा है। हालांकि इसके बाद भी विपक्षी नेताओं में आपसी समझ नही बन पा रही है। सीटों का बंटवारा करने का काम नेताओं का है। साथ मिलकर बैठने का काम भी नेताओं का है।

लेकिन वोट देने का काम मतदाता का है। उसके बारे में यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि वह दलों के नेताओ के कहने पर दूसरे दल को वोट भी देने के लिए निकल जायेगा। इससे मोदी को अधिक वोट मिलने की संभावना बनती दिख रही है। यही कारण है कि मोदी भाजपा के लिए 370 और राजग के लिए 400 से अधिक सीटों का दावा कर रहे है। दावा भी संसद में ताकि रिकार्ड रहे। देश का वातावरण प्रधानमंत्री को गुप्तचरों के माध्यम से मिल ही जाता होगा। यह आम चुनाव आने वाले भारत का इतिहास लिखने जा रहा है। मोदी के पास 2047 के भारत की कल्पना है। उसके लिए वे तैयारी भी कर रहे हंै। विपक्ष के पास 2024 के चुनाव का रोडमैप भी नहीं है। विपक्ष देश में नकारात्मकता भरने का प्रयास कर रहा है। मोदी नर्वस और गुलाम मानसिकता से युवाओं को और देश को निकालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन विपक्षी दलों की ओर से यही प्रयास हो रहा है कि भारत में तो कुछ भी ठीक नहीं है यह बता कर युवाओं को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि युवा सब समझता है और वह मानता है कि देश ने आगे बढऩे का सिलसिला शुरू कर दिया है।

(लेखक हिदी पत्रकारिता फाउंडेशन के चेयरमैन हैं) संवाद इंडिया

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