किसानों के लिए चेतावनी

वह दिन हर दम याद रखना होगा जब देश के किसान नेताओं ने केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये तीन बिलों को वापस कराने के लिए आन्दोलन किया था। देश में कभी नहीं हुआ कि कोई कानून बना हो और उसको संपूर्ण वापसी की मांग हुई हो।

वह दिन हर दम याद रखना होगा जब देश के किसान नेताओं ने केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये तीन बिलों को वापस कराने के लिए आन्दोलन किया था। देश में कभी नहीं हुआ कि कोई कानून बना हो और उसको संपूर्ण वापसी की मांग हुई हो। क्योंकि कोई संपूर्ण गलत नहीं हो सकता। इसलिए यहां किसान नेताओं ने भारतीय किसान की भावनाओं का दोहन किया और उन्हें सरकार के विरोध में खड़ा करने का प्रयास किया। जो सरकार सेना को सर्वोच्च सम्मान दे रही हो और किसान को समान रूप में मानकर उसे भी सम्मान देती हो, उसके बारे में कुछ देर रूक कर विचार करने की जरूरत भी नहीं समझी गई। आन्दोलन समाप्त हो गया क्योंकि बिल वापस ले लिए गये। उसके बाद भी किसानों को लाभ देने का क्रम जारी रहा। मतलब सरकार के मन में किसान को लाभ देना है। एमएसपी की राशि को लगातार बढाया जा रहा है। जिस दर से महंगाई बढ़ रही है उससे कहीं अधिक गति से एमएसपी को बढ़ाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय की समिति ने तीनों बिलों को खराब नहीं अपितु किसानों के हितैषी माना। लेकिन किसान नेताओं ने विषय को सोचने की बजाए भावनाओं को हवा देने का काम किया। परिणाम सबके सामने है। अब भी शुद्ध विचारों के किसान की भावनाओं को छलने का काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की केबिनेट ने फसन नुकसान के लिए मुआवजा राशि बढ़ाकर यह सिद्ध कर दिया है कि सरकार किसानों के हित की रक्षा करने के लिए वचनबद्ध है। इसलिए किसानों को विचार करना होगा कि वे अपने नेताओं की हर प्रकार की बातों को आंख बंद करके मानने की रणनीति पर न चलेंगे या फिर अपने विवेक का इस्तेमाल भी करेंगे।
आज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा किसानों के सामने उनके दोहन का है। पिछले दिनों से राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक किसानों की आड़ में केन्द्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। राजनेता को सरकार से सवाल पूछने और गलती पर आरोप लगाने का अधिकार है लेकिन आरोपों में प्रमाणिकता होना चाहिए। मलिक किसानों की भावनाओं के साथ खेलकर अपने राजनीतिक उल्लू सिद्ध करना चाह रहे हैं। जिस प्रकार के आरोप लग रहे हैं वे भावनाओं को भड़काने वाले हैं लेकिन जब सहज भाव से उन पर विचार किया जाये तो वे ठहरते नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि सत्यपाल को पता है कि किसान चरण सिंह के साथ का समर्थन करेंगे और उससे अपना उल्लू सीधा किया जा सकता है। वे ऐसा ही कर रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button