विजयवर्गीय ने कार्यसमिति में जमकर सुनाई खरी-खरी

भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक में खूब तालियां बटोरी। उन्होंने अपनी ही सरकार के मंत्रियों को भी नहीं छोड़ा और संगठन पर भी खूब चुटियां ली।

विशेष प्रतिनिधि, भोपाल। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक में खूब तालियां बटोरी। उन्होंने अपनी ही सरकार के मंत्रियों को भी नहीं छोड़ा और संगठन पर भी खूब चुटियां ली। जिलाध्यक्षों को सीख दी और नाराज कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर उनसे मिलने की नसीहत दी। विजयवर्गीय की बात पर खूब तालियां बजी क्योंकि जो बात कोई कह नहीं पाता उसे महामंत्री के अधिकार की आड़ में उन्होंने कह दिया।

विजयवर्गीय ने प्रभारी मंत्रियों को लेकर खूब तंज कसे। कहा हवा की तरह आते हैं और तूफान की तरह चले जाते हैं। कार्यकर्ता को कोई भाव ही नहीं मिलता। यह चुनावी साल है इसलिए काम करने का तरीका सुधारने की सलाह भाजपा महामंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि जिलों के अध्यक्षों का हाल तो यह हो गया है कि वे पुराने और बड़े नेताओं से मिलने ही नहीं आते हैं। यदि कोई नेता उनके कार्यालय में आ जाता है तब वे कुर्सी पर चिपके रहते हैं खड़े तक नहीं होते। यह नहीं होना चाहिए। हर नेता की अपनी क्षमता होती है इसलिए किसी को नाराज करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। 10 वोट काटने का भी चुनाव में प्रभाव होता है।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्यकर्ता की नाराजगी का मतलब क्या होता है? आप कर्नाटक के चुनाव परिणामों से समझीये। वहां 37 सीटें ऐसी हैं जो कम अन्तर से हम हारे हैं। वे सभी कार्यकर्ता की नाराजगी के कारण हारी गई हैं। हम कार्यकर्ता को महत्व देंगे तो वह चुनाव में काम करेगा। कैलाश की इस सीख को मंच पर बैठे नेतागत सुनते रहे और सभी पदाधिकारी इस राष्ट्रीय पदाधिकारी और प्रदेश की नब्ज पहचानने वाले नेता को रोकने का कोई संकेत नहीं दे पाया। वैसे भी आमतौर पर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी व संगठन मंत्री के भाषण सुनने और उन्हें धन्यवाद कहने के बाद बीत जाती रही है। अब चुनावी वर्ष है इसलिए नेता कार्यकर्ता की बात कह कर उनका मन जीत रहे हैं। ऐसा सुनकर कार्यकर्ता राजी हो जायेगा और उसे फिर से युद्ध का वानर बनाकर सत्ता की मलाई खुद चाटने लग जायेंगे।

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