मास्टर प्लान तो आया नहीं उल्टे भोपाल की लाइफ लाइन में बढ़ता जा रहा अतिक्रमण

पहले के चिन्हित अतिक्रमण भी नहीं हटाया पाया प्रशासन

शिखर वाणी, भोपाल। राजधानी की शान कहे जाने वाले बड़े तालाब का दम घोटने की कवायद जारी है। तालाब के केचमेंट एरिया में पहले से मौजूद अतिक्रमण हट भी नहीं पाए कि नए अतिक्रमण लगातार सामने आ रहे हैं। शहर का मास्टर प्लान भी तालाब के कारण ही अटका हुआ है।

बड़े तालाब की जद में आने वाले नाथू बरखेड़ा, वनट्री हिल्स से बैरागढ़, भदभदा से सूरज नगर और बिसनखेड़ी समेत अन्य स्थानों में बड़े-बड़े फार्म हाउस काटे जा रहे हैं। यहां पानी में ही 10 से 15 फीट ऊंचे पिलर खड़े कर दिए गए हैं। बोट क्लब के आगे निर्माणाधीन फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के पास मिट्टी डालकर 15 हजार स्क्वायर फीट जमीन की पुराई कर दी गई है। लेकिन शिकायत करने के बाद भी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। पालीथिन और पत्थर युक्त मिट्टी डालकर पुराई की गई है। लेकिन झील का संरक्षण करने के लिए नगर निगम द्वारा बनाई गई झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारी को इसकी खबर ही नहीं है। अतिक्रमणकारियों से मिलीभगत होने की वजह से अधिकारी यहां कार्रवाई नहीं करते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा दो साल पहले किए गए सर्वे किए थे जिसमें तालाब के आसपास 1300 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किया गया था। जिसके बाद निगम प्रशासन ने 980 लोगों को नोटिस जारी किया था। लेकिन दो साल का समय बीतने के बाद भी निगम अमले ने अब तक एक भी अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई नहीं की है। बैरागढ़, खानूगांव की तरफ बड़ेे तालाब पर सबसे ज्यादा अतिक्रमण है। यहां पर 523 लोगों को नोटिस जारी किए है। लेकिन रसूखदारों के रौब के चलते ही यह अभियान शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चला गया।

तो छिन जाएगा रामसर साइट का दर्जा

बता दें बड़े तालाब को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। नियमानुसार तालाब सीमा से 50 मीटर दूरी तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। लेकिन फार्म हाउस काटे गए हैं। सूरज नगर एरिया में भी नए नए अतिक्रमण जारी हैं। यहां रसूखदारों ने जमीन खरीद रखी हैं और उनके फार्म हाउस भी बने हैं। रसूखदारों के दबाव से प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाता।

अन्य तालाबों की हालत चिंताजनक

बड़े तालाब के आलावा राजधानी में 14 छोटे-बड़े तालाबों में से तीन का अस्तित्व खत्म हो चुका है। उदाहरण के लिए मोतिया तालाब पर सीमेंट-कंक्रीट का जंगल खड़ा हो गया है। गुरुबक्श की तलैया व अच्छे मियां की तलैया का का सिर्फ नाम बचा है तालाब नहीं है। नवाब सिद्दीक हसन तालाब अतिक्रमण से घिरा है। छोटा तालाब और शिवाजी नगर का तालाब जलकुंभी से पटा है।

अतिक्रमण से नुकसान

  • तालाब का ईकोसिस्टम खराब हो जाएगा।
  • तालाब में विदेशी पक्षी आते हैं जो आना बंद हो जाएंगे।
  • अतिक्रमण से सरहद सिकुड़ जाएगा, इससे पानी स्टोरेज कम हो जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मान रामसर साइट का गौरव छिन जाएगा।
  • तालाब के किनारे मानवीय दखल से सीवेज आदि गंदगी मिलने लगेगी, जिससे पानी दूषित होगा।

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