बिना परीक्षा के शिक्षकों को मिले राज्यकर्मी का दर्जा, कांग्रेस के बाद वाम दलों ने नीतीश पर बनाया दबाव

 बिहार

बिहार में नई भर्ती नियमावली के खिलाफ आंदोलन कर रहे शिक्षकों के मुद्दे पर महागठबंधन सरकार में घमासान मच गया है। कांग्रेस के साथ ही वाम दल शिक्षकों के समर्थन में आ गए हैं। लेफ्ट पार्टियों के नेताओं ने बुधवार को साझा बयान जारी कर कहा कि वे नीतीश सरकार की नई शिक्षक नियमावली का समर्थन नहीं करते हैं। नियोजित शिक्षकों को बिना किसी परीक्षा के राज्यकर्मी का दर्जा मिलना चाहिए। इससे पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी यह मुद्दा उठाते हुए सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखा था।

तीनों वाम दल (सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई माले) के नेताओं ने साझा बयान जारी कर बुधवार को कहा कि 2020 में विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन का संकल्प पत्र जारी किया गया था। उसमें सभी शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने का वादा किया गया था। उस समय नीतीश कुमार गठबंधन का हिस्सा नहीं थे। मगर अब वे महागठबंधन सरकार के मुखिया हैं। ऐसे में उन्हें संकल्प पत्र में किए गए वादों का सम्मान करना चाहिए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी इसी तरह का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी आंदोलन कर रहे शिक्षकों के समर्थन में खड़ी है। उन्होंने कहा कि हम ट्रैक से कैसे पीछे हट सकते हैं? इस संबंध में उन्होंने सीएम नीतीश को पत्र लिखा है।

बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने भी मुख्यमंत्री से आंदोलन कर रहे शिक्षकों से बातचीत कर उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगों को लेकर वे जल्द ही सीएम नीतीश से मुलाकात करेंगे।

क्या है मामला?
बिहार सरकार ने शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए नई शिक्षक भर्ती नियमावली लेकर आई। नई नियमावली के तहत नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा लेने के लिए भर्ती प्रक्रिया से गुजरना होगा। राज्यभर के शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। पटना समेत अन्य जिलों में उन्होंने प्रदर्शन भी किया। वे सरकार से नई नियमावली वापस लेने की मांग कर रहे हैं। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान मच गया है।

 

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