बच्चों का यौन शोषण आरोपियों की ‘अमानवीय मानसिकता’ को दर्शाता है : कोर्ट

मुंबई
मुंबई की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के जुर्म में 64 वर्षीय शख्स को 20 वर्ष जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि बच्चों के यौन शोषण के मामले आरोपी की ''अमानवीय मानसिकता'' को दर्शाते हैं और बच्चे अपनी कम उम्र तथा शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण आसानी से उनका शिकार बन जाते हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना नवंबर 2019 में हुई जब आठ साल की लड़की मुंबई में आरोपी के घर उसकी पोती के साथ खेलने गयी थी। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) कानून के तहत मामलों की सुनवाई कर रहीं विशेष न्यायाधीश प्रिया बांकर ने  बुजुर्ग को आठ साल की लड़की के यौन शोषण का दोषी ठहराया।

न्यायाधीश ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, ''बाल यौन शोषण के मामले आरोपियों की अमानवीय मानसिकता को दर्शाते हैं। बच्चे अपनी कम उम्र, शारीरिक रूप से कमजोर होने और जीवन तथा समाज का अनुभव न होने के कारण आसानी से शिकार बन जाते हैं।''

मौजूदा मामले में अदालत ने कहा कि घटना का पीड़ित बच्ची, उसके परिवार और तो और समाज पर ''बहुत ही प्रतिकूल असर'' पड़ा है। अदालत ने कहा, ''उनके मन में धारणा बन गयी है कि घर और पास-पड़ोस बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे समाज में चिंताजनक हालात पैदा होने वाले हैं।'' अदालत ने कहा कि इस घटना का पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर असर पड़ा है तथा वह इसे भुला नहीं पाएगी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवंबर 2019 में पीड़िता दोषी शख्स के घर में उसकी पोती के साथ खेलने के लिए गयी थी। बाद में उसकी पोती नजदीक की एक दुकान पर चली गयी। पीड़िता जब घर पर अकेली रह गयी तो बुजुर्ग शख्स ने उसे अपने पास बुलाया और उसका यौन शोषण किया। घर लौटने पर बच्ची ने अपनी मां को घटना के बारे में बताया जिसके बाद आरोपी के खिलाफ बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लैक्स (बीकेसी) पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया गया।

 

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