रूस को यूक्रेन से जंग में हुआ भारी नुकसान, अब तक 20 हजार से अधिक रूसी सैनिकों ने गवाई जान

वाशिंगटन.
 यूक्रेन के खिलाफ जंग में रूस को भी हाल के दिनों में खासा नुकसान उठाना पड़ा है और दिसंबर 2022 के बाद से अब तक यानी बीते 5 महीनों में उसके 20,000 से अधिक सैनिक मारे गए हैं, जबकि एक लाख से अधिक घायल हुए हैं. सीएनएन के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारी जॉन किर्बी ने यह दावा किया है.

किर्बी ने सोमवार को संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि रूस ने ‘अपने सैन्य भंडार और अपने सशस्त्र बलों को खत्म कर दिया है’ और अमेरिका का अनुमान है कि दिसंबर के बाद से एक लाख रूसी सैनिक हताहत हुए हैं, जिनमें 20 हजार सैनिकों की मौत हुई है.

वैगनर ग्रुप के दावों को बताया हास्यास्पद
रणनीतिक संचार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के समन्वयक के रूप में काम करने वाले किर्बी ने कहा कि मारे गए लोगों में से लगभग आधे रूस की निजी सेना वैगनर के लड़ाके थे. किर्बी ने वैगनर के नेता येवगेनी प्रिगोजिन के हालिया दावे की भर्त्सना की, जिन्होंने रविवार को कहा था कि उनके समूह के केवल 94 सैनिक हताहत हुए है. किर्बी ने प्रिगोजिन की टिप्पणियों को ‘महज एक हास्यास्पद दावा’ करार दिया.

किर्बी ने नहीं दिया आंकड़ों का श्रोत
वहीं किर्बी से जब एक लाख रूसी सैनिकों के हताहत होने के आंकड़े के स्रोत को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह ‘कुछ डाउनग्रेड की गई खुफिया जानकारियों पर आधारित है, जिसे हमने एकत्र किया है.’ सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यूक्रेनी सेना के हताहतों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया. उन्होंने दलील दी कि अमेरिका ने ‘कभी’ ऐसी जानकारी प्रदान नहीं की है और ये आंकड़ें यूक्रेन ही साझा करेगा. किर्बी ने इसके साथ ही कहा, ‘यूक्रेनी ‘यहां पीड़ित हैं और रूस आक्रामक है, और मैं बस सार्वजनिक डोमेन में जानकारी डालने नहीं जा रहा हूं, जो फिर से, यूक्रेन के लिए इसे और कठिन बना देगा.’

बखमुत में मोर्चेबंदी की लड़ाई
इस बीच, यूक्रेनी सेना ने कहा कि य
ह एक ‘मोर्चेबंदी वाले संघर्ष’ में है, क्योंकि बखमुत में भयंकर लड़ाई जारी है. इसके साथ ही दावा किया कि उसने सिलसिलेवार जवाबी हमलों से रूसी सेना को पीछे धकेल दिया है. यूक्रेनी सशस्त्र बलों के पूर्वी समूह के प्रवक्ता सेरही चेरेवती ने एक राष्ट्रीय प्रसारक को बताया, ‘मैं निश्चित रूप से इस जानकारी की पुष्टि कर सकता हूं कि बखमुत में हमारे कुछ जवाबी हमलों के बाद दुश्मन कुछ मोर्चों से पीछे हट गया है.’

यह समझाते हुए कि सीमा रेखा लगातार बदल रही है, चेरेवती ने कहा कि वहां मोर्चेबंदी की लड़ाई चल रही है.’ उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी तोपों के जोरदार हमलों और बुनियादी ढांचे के विनाश के बाद दुश्मन को कुछ सफलता मिलती है, और वे आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन हम पलटवार करते हैं और अक्सर दुश्मन पर जवाबी हमले के बाद अपना मोर्चा वापस जीत लेते हैं.’

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