थानों के सामने वाहनों पर झपट्टा मारते हैं पुलिसकर्मी हेलमेट की आड़ में जनता को करते हैं भयभीत

नए शहर के विभिन्न चौराहों पर या पुलिस थानों के सामने पुलिस की छापेमार कारवाही चर्चा का विषय बनती जा रही है। जब यातायात का दबाव ऑफिस पहुंचने के लिए अधिक होता है पुलिस सड़क पर उतर आती है। वह इस प्रकार झपट्टा

भोपाल विशेष प्रतिनिधि। नए शहर के विभिन्न चौराहों पर या पुलिस थानों के सामने पुलिस की छापेमार कारवाही चर्चा का विषय बनती जा रही है। जब यातायात का दबाव ऑफिस पहुंचने के लिए अधिक होता है पुलिस सड़क पर उतर आती है। वह इस प्रकार झपट्टा मारती है कि चालक अपना वाहन नहीं संभाल पाता। दुर्घटना की संभावना भी बढ़ जाती है। इस बारे में इन पुलिसकर्मियों का तर्क रहता है दुर्घटना से मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। इसलिए हमें हेलमेट चेकिंग के निर्देश हैं। लेकिन वे अपने इस तरीके पर कोई जवाब नहीं देते। इस प्रकार पुलिस को देख कर बिना हेलमेट वाले वाहन इधर-उधर भागते हैं। जिससे दुर्घटना की संभावना बनती है।

एक समुदाय विशेष की आबादी अधिक होने के कारण वाहन चेकिंग के पुराने भोपाल में तौर तरीके अलग है। वहां पुलिस बिना हेलमेट वाले वाहनों को भयभीत होकर रोकती है। उनके दबाव और जवाब में चालान बनेगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती। इसके विपरीत नए भोपाल में पुलिस कर्मियों का तौर तरीका बदल जाता है। वे बिना हेलमेट वाले वाहनों को रोकने के लिए झपट्टा मारने का प्रयास करते हैं। इसे एक बारगी गोरिल्ला युद्ध भी कह सकते हैं। थाने के सामने 5-7 पुलिसकर्मी खड़े होते हैं। सड़क को इस प्रकार घेरते हैं मानो कोई बड़ा अपराधी आ रहा हो। मकसद केवल चालान बनाना होता है। तय की गई धनराशि एकत्र होते ही दुर्घटनाओं की चिंता छोड़ कर यह पुलिसकर्मी बैरक में लौट जाते हैं। इस बारे में जब भी इनसे बात की जाती है इनका एक ही जवाब रहता है। दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढ़ रहा है । मौत की संख्या अधिक हो रही है। इसलिए हेलमेट चेकिंग जरूरी है। जब उनसे यह पूछा जाता है थाने के सामने हेलमेट चेकिंग से दुर्घटना रुकने का प्रतिशत कम होगा? यह किस प्रकार का विश्लेषण है? पुलिसकर्मियों का जवाब होता है हमें जो आदेश प्राप्त हुआ है हम उसका पालन कर रहे हैं।

थाने के सामने, चौराहे पर वाहन चेकिंग की बजाए यदि यातायात व्यवस्था के नियमों का पालन कराने के लिए सड़क पर व्यवस्था की जाए तो दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। नियम तोड़ने वाले व्यक्ति के खिलाफ प्रक्रिया के तहत कार्रवाई किए जाने का स्वागत होगा और पुलिस प्रशासन पर वसूली के आरोप कम लगेंगे। दिल्ली सहित अन्य महानगरों में चौराहे पर खड़ी पुलिस यदि यातायात के नियम तोड़ता कोई भी व्यक्ति पकड़ा जाता है तो वह उसे दंडित करने की कार्यवाही करती है। इससे नियमों के पालन के प्रति सहज भाव से स्वीकार्यता बनती है। यदि चालान काटने और वसूली करने की मानसिकता से झपट्टा मार कार्रवाई होती है तब जनता में इसके प्रति आक्रोश उत्पन्न होता है। इसी प्रकार का आक्रोश भोपाल में तो कम से कम दिखाई दे ही रहा है।

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