40 वर्षों में 2 हजार से अधिक कवि सम्मेलनों का किया कविता पाठ

अमेरिका,  ओमान, दुबई, नेपाल  तक बजाया इटारसी का डंका

इटारसी, विश्वनाथ सिंह। जी हां यह सौ फीसद सच है कि इटारसी के तिरुपति नगर निवासी  राजेंद्र मालवीय ‘आलसी’ ने अपने जीवन के 40 वर्ष मैं देश से लेकर विदेशों तक 2 हजार कविताओं का पाठ कर सबको मुरीद बना दिया। 29 सितंबर 1958 को कमला देवी एवं दुर्गा प्रसाद मालवीय के घर जन्मे इन अभिभावक  ने कल्पना भी नहीं की थी यह बालक विदेशों तक माता-पिता का नाम रोशन करेगा। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही जाते हैं कि वह बड़ा होकर क्या बनेगा। मां की लोरी और भगवान कृष्णा की बचपन अटकेलिया देखकर  इनका स्वभाव मजाकिया बन गया था। बचपन से ही हंसी मजाक के सहारे गार्जियन एवं मोहल्लों के निवासियों से अपनी जिद्द पूरी कराने में उन्हें महारत हासिल हो चुकी थी। बस फिर क्या था यही सिलसिला इनके स्कूल में भी जारी रहा और टीचर से लेकर बच्चे भी इनके मुरीद होते चले गए।
आप सब ने सुना होगा ‘वाह वाह क्या  बात है’ से लेकर ‘ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ दूरदर्शन के ‘सुरभि’ और जॉनी लीवर जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ राजेंद्र मालवीय ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वर्क 1988 में  मुंबई में इन्हें  श्री नारायण दीक्षित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जयपुर में वर्ष 1992 में महामूर्ख सम्मान एवं  कोलकाता में आलसी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 1998 में इन्हें इन्हें दिल्ली में सम्मान की विभूषित किया गया।  वर्ष 1999 में इनकी जीवन में एक सुनहरा अवसर आया और इन्हें अमेरिका के न्यूयॉर्क  बाल्मीकि पुरस्कार, विश्व हिंदी समिति द्वारा सम्मानित किया गया। इसके बाद
उनके अथक प्रयासों की सीमा यह रही कि इन्हें वर्ष 2005 में चेन्नई मैं ‘आलस सम्राट सम्मान’ से विभूषित किया गया। वर्ष 2007 में पूरे मध्यप्रदेश में इन्हें कई बार सर्वश्रेष्ठ टेपा  सम्मान  उज्जैन से उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। वर्क 2010 में  बेंगलुरु में सम्मान एवं वर्ष 2015 वाराणसी में पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उपलब्धियों की इतनी श्रंखला इन्होंने कायम की जिस की कलम से कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

टेपा सम्मान से कई बार हो चुके सम्मानित

इटारसी के राजेंद्र मालवीय कवि के रूप में विदेशों तक अपने ख्याति का डंका बजा चुके हैं। इन्हें सर्वश्रेष्ठ सम्मान टेपा से कई बार सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा माहेश्वरी समाज, एनटीपीसी, पुणे फेस्टिवल, साहित्य कला मंच, राष्ट्रीय कवि सम्मेलन सम्मान, झांसी महोत्सव, नगर पालिका छतरपुर एवं इटारसी नगर के गौरव का भी सम्मान मिल चुका है।

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