काबुल हवाई अड्डा हमला : आईएसआईएल-के दो सदस्यों को संरा ने किया प्रतिबंधित

संयुक्त राष्ट्र
 आईएसआईएल-के एक प्रवक्ता सहित दो सदस्यों को अगस्त 2021 में काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास हुए घातक आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी लेने के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र ने काली सूची में डाल दिया है।

अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के दौरान किए गए इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक और करीब 170 अफगान नागरिक मारे गए थे।

‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान’ (आईएसआईएल-के) के प्रवक्ता सुल्तान अजीज आजम और एक अन्य सदस्य मौलवी रजब पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध समिति ने बुधवार को पाबंदी लगाई।

अफगानिस्तान के इन दोनों नागरिकों को जिस प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है, उसके तहत इनकी संपत्ति जब्त की जाएगी और इन पर यात्रा प्रतिबंध भी लागू होंगे।

प्रतिबंध समिति के अनुसार, 26 अगस्त 2021 को आजम ने काबुल में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास आत्मघाती हमले के लिए आईएसआईएल-के की ओर से जिम्मेदारी ली थी, जिसमें कम से कम 170 अफगान और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।

समिति के मुताबिक, आईएसआईएल-के के प्रवक्ता के रूप में सुल्तान अजीज आजम ने संगठन की हिंसक जिहादी विचारधारा को फैलाने, आतंकवादी कृत्यों का महिमामंडन करने और उसे न्यायोचित ठहराने में ‘‘महत्वपूर्ण भूमिका’’ निभाई।

प्रतिबंध समिति ने कहा कि रजाब (46) को आईएसआईएल-के या अल-कायदा से जुड़े होने और आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने, उन्हें अंजाम देने में मदद करने तथा वित्त जुटाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में तालिबान से महिलाओं पर लगे प्रतिबंध हटाने की अपील की

 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने  एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी, जिसमें अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से देश में महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए कठोर प्रतिबंधों को तेजी से हटाने की अपील की गई है।

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं के उच्च शिक्षा हासिल करने, उनके नौकरी करने और सार्वजनिक स्थानों पर अकेले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाली महिलाओं पर तालिबान के प्रतिबंध की निंदा की और प्रस्ताव में इस निर्णय को ‘‘संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अप्रत्याशित’’ बताया।

अफगानिस्तान से अगस्त 2021 में अमेरिका और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) बलों की वापसी के बाद तालिबान ने सत्ता पर कब्जा करने पर वादा किया था कि इस बार उसका शासन 1996 से 2001 के उसके पहले कार्यकाल की तुलना में उदार होगा, लेकिन तालिबान के नेता महिलाओं और लड़कियों पर धीरे-धीरे कड़ा शरिया कानून लागू कर रहे हैं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में ‘‘तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के बढ़ते हनन पर गहरी चिंता व्यक्त’’ की गई है और अफगान समाज में उनकी ‘‘अहम भूमिका’’ की पुष्टि की गई है।

 

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