केजरीवाल पर इमोशनल खेला जनता पर असर डालेगा…क्या यह आप के अस्तित्व का संकट है?

छह महीने की जेल यात्रा के बाद संजय सिंह बाहर आ गये हैं। उनका पहला भाषण तीखा रहा लेकिन दर्द भी उसमें था। यह स्वभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गैर भाजपाई राज्यों में प्रकरण दर्ज कराकर दरोगा भेजने की बात कहना नासमझी और असल बात से साथ तालमेल का अनुचित तरीका है।

सुरेश शर्मा। छह महीने की जेल यात्रा के बाद संजय सिंह बाहर आ गये हैं। उनका पहला भाषण तीखा रहा लेकिन दर्द भी उसमें था। यह स्वभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गैर भाजपाई राज्यों में प्रकरण दर्ज कराकर दरोगा भेजने की बात कहना नासमझी और असल बात से साथ तालमेल का अनुचित तरीका है। केजरीवाल के खिलाफ थाने में प्रकरण दर्ज नहीं है और न ही कोई दारोगा उन्हें पकड़ने आया। उन पर शराब नीति के बदले करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप है और गिरफ्तार ईडी ने किा है। इसलिए तुलना बेमानी और मूल विषय से हटने की बात है। केजरीवाल को माेदी की भांति परोसकर आप के नेतागण इमोशनल कार्ड खेलने का प्रयास कर रहे हैं इसका कितना प्रभाव मतदाताओं पर पड़ेगा इसका सर्वे होने पर ही पता चलेगा कि प्रभाव किस दिशा में पड़ रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर आप का इस बार का स्टेंड 2014 के अन्ना आन्दोलन के समय से भिन्न है। कांग्रेस का स्टेंड वही है। विपक्षी दल भी अब भ्रष्टाचार के आरोपों के पैरोकार होते जा रहे हैं। अबकी बार जनादेश का यह बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। क्या राजनेताओं के भ्रष्टाचार को नेतागिरी का कवच मिलना चाहिए? मोदी सरकार ने आतंकवाद और भ्रष्टाचार के िवषयों पर जीरो टालरेंस की नीति बनाई है तथा यह भी साफ किया है कि तीसरी बार सरकार बनने के बाद इन विषयों पर और तेज कार्यवाही की जायेगी। आप कांग्रेस को पछाड़कर आगे निकलती हुई भाजपा को चुनौती देने जैसी राष्ट्रीय पार्टी हो चुकी है। अब जब पार्टी के चार बड़े और शीर्ष नेता भ्रष्टाचार के मामले में जेल की हवा खा रहे हैं या चुके हैं तब क्या समय आप के अस्तित्व को संभालने का है? चुनाव में इसका अनुकूल या प्रतिकूल किस प्रकार का प्रभाव पड़ेगा समझने का विषय बनता जा रहा है।

राज्यसभा सांसद और पिछले छह माह से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जेल काट रहे संजय सिंह जमानत पर रिहा होकर घर आ गये हैं। वे सबसे पहले सुनीता केजरीवाल से सीएम निवास पर मिलने पहुंचे। उसके बाद पार्टी कार्यालय गये। पार्टी कार्यालय से अिधक प्रभावशाली स्थान सुनीता जी का घर रहा। यह आप की राजनीति का नया केन्द्र हो गया है। इसे आगे चलकर परिवारवाद का दंश सिद्ध करने के प्रयास होंगे? संजय सिंह ने अपने पहले संबोधन में जमकर गुस्सा दिखाया। यह स्वभाविक है। उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि नेताओं के खिलाफ इस प्रकार की कार्यवाही करने के मतलब बदले की भावना से काम करना होता है। उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि यदि गैर भाजपाई शासन वाले राज्यों जिनके मुख्यमंत्री इंडी गठबंधन के सदस्य हैं वहां यदि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ मामले दर्ज कर लिये गये और वहां से दरोगा इन दोनों को पकड़ने आ गये तब क्या इस्तीफा देंगे? लेकिन यह तुलना प्रासांगिक नहीं है। केजरीवाल सहित आप के जितने भी नेता हैं उन किसी थाने में सरकार के इशारे पर या एनडीए के दलों की सरकारों ने मामला दर्ज नहीं कराया। यह सारे नेता शराब घोटाले में करोड़ों के गोलमाल और अनियमितताओं के कारण जेल में हें। इन्हें किसी दरोगा ने नहीं ईडी ने गिरफ्तार किया है। न्यायालय इस मामले की दिन प्रतिदिन की निगरानी कर रहा है। इसलिए यह तुलना मूंह छिपाने के लिए काम आने वाली नहीं है।
संजय सिंह को जमानत ईडी के विरोध न करने भर से नहीं अपितु सहमति देने के बाद मिली है। इसके बाद भी न्यायालय ने पांच शर्ते भी लगाईं हैं। खास बात यह है कि संजय सिंह ट्रेक पर रहने वाले हैं। कहां हैं इसकी जानकारी ईडी के जांच अधिकारी के पास रहेगी। पासपोर्ट जमा कराना होगा। मनीष सिसोदिया को तो एक साल से जमानत नहीं मिली है। वे तिहाड़ की शोभा बढ़ा रहे हैं। अब केजरीवाल को लेकर भी न्यायालय के सामने पक्ष रखा जा रहा है कि उन्हें चुनाव के लिए राहत दे दी जाये। अभी निर्णय अभी आना शेष है। ऐसे में आप के सामने कई गंभीर संकट सामने आ रहे हैं। पार्टी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती हुई दिखाई दे रही है। दो प्रकार की बातें सामने आती हैं। आन्दोलन से उपजी पार्टी है। यह सत्य है लेकिन आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ था। उसमें भ्रष्टाचार करने की बात नहीं थी और उससे बचने के फार्मूले की बात भी नहीं थी। अब वर्तमान परिस्थितियों में आप की ट्रेक रिकार्ड बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। राजनेताओं को भ्रष्टाचार पर किसी भी प्रकार का कवच नहीं मिल सकता है। यही मोदी सरकार की नीति है। कमोवेश इसी प्रकार की बातें वे सरकारें भी करती हैं जिनके नेता भ्रष्टाचार के मामले में या तो जेल हें या वांटिड हैं।

पिछले दिनों एक राजनीतिक तुलना गलियारों में शुरू हुई। दस साल बाद चुनाव के समय फिर से आन्दोलन का वही स्थान पर भीड़भाड़ वाला रहा। दिल्ली का रामलीला मैदान एक बार फिर से भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाने का साक्षी बना है। इसके तीन किरदार वही हैं जो पहले भी थे। अन्ना हजारे के साथ केजरीवाल, कांग्रेस और भ्रष्टाचार। 2014 में जब यह आन्दोलन शुरू हुआ था, अन्ना हजारे अनशन तक पहुंचे थे। उसी समय भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए केजरीवाल सामने आये और उन्होंने राजनीति में आमूल चूल परिवर्तन के लिणए राजनीतिक दल बनाने का संकल्प लिया। तब भ्रष्टाचार कांग्रेस के साथ चस्पा था। अब 2024 में फिर से रामलीला मैदान पर भ्रष्टाचार को लेकर भीड़ हुई। मतलब भ्रष्टाचार के मामले में दशहरा मैदान फिर से साक्षी बना। इसमें अन्ना नहीं थे लेकिन केजरीवाल भ्रष्टाचार रोकने के िलए राजनीति में आये थे लेकिन इस बार वे भ्रष्टाचार के अारोपों के बीच जेल में हैं और उनको इस आरोप में क्यों पकड़ा इसके विरोध में रामलीला मैदान में जमावड़ा हुआ? इसमें कांग्रेस की भूमिका में कोई बदलाव नहीं आया। वह पहले भ्रष्टाचार के केन्द्र में थी और भी वह बचाव करती हुई दिखाईदे रही है। यह हो सकता है कि कांग्रेस को इस बात की खुशी हो कि उन पर आरोप लगाने वाला आज भ्रष्टाचार के मामले में जेल में है। इससे कांग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने की संभावना भी देख रही होगी?

आप एक पार्टी के रूप में अपनी विचारधारा से पूरी तौर पलट गई है। उसने आन्दोलन के हवन कुंड से जब राजनीतिक दल के रूप में उदय लिया था तब नई राजनीति करने का विश्वास देश को दिया था। जिसमें भ्रष्टाचार को रोकने के िलए लोकपाल होगा? रिश्वत मांगने वालों के ट्रेप करने का सपना था। गरीब का विकास जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा भी शामिल था। परिवारवाद नहीं होगा और सत्ता का सुविधाओं से दूरी होगी। धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होगी यह भी आप के नेताओं का भरोसा था। आज इनमें से कोई भी विषय इस दल के नेताओं से अछूता नहीं रहा। इसलिए मुफ्त की रेवड़ी से गरीबों के वोट पाने के अलावा देशव्यापी आधार संकुचित होता जा रहा है। केवल मोदी से केजरीवाल की तुलना करके मोदी जैसा नहीं बना जा सकता हे। उसके लिए देश को किस प्रकार का बनाया जायेगा वह विजन भी पेश करना होता है। जिस नेता को अपने साथियों पर इतना भी भरोसा नहीं है कि जेल के समय किसी को मुख्यमंत्री बना िदया जाये। वह जेल से आने के बाद स्थान छोड़ देगा। इसलिए पत्नी को संदेश की आड़ में आगे करके सत्ता का संचालन करने का खेल शुरू कर िदया गया। यह वह नयी विचारधारा और राजनीति संस्कृति नहीं हो सकती है। इसलिए आप के लिए आने वाला समय संकट से भरा हुआ ही होने वाला है।नरेन्द्र मोदी इमोशनल कार्ड परिणाम के बाद खेलते हैं।

राम मंदिर का निर्माण कराने के बाद ही उसकी श्रेय लेने की योजना बनी। इसलिए मोदी की आलोचना करके मोदी की बराबरी नहीं की जा सकती है। लोकतंत्र में जनसमर्थन ही किसी नेता को भारत का सिरमौर बना सकता है। आप के नेता उदाहरण जिस प्रकार का देते हैं उसमें झूठ साफ दिखाई दे जाती है। ईडी के मामले मंें जिस राह पर केजरीवाल चले थे उसकी तुलना मोदी के साथ नहीं हो सकती हे। मोदी से भी पूरे दिन की पूछताछ हुई थी। वे पहले बुलावे पर ही वहां पहुंच गये थे। भ्रष्टाचार के आरोपों की गहराई को अभी भ्ाी समझने के बिना ही वही राजनीति की जा रही है जो दिल्ली की सरकारी चलाने के लिए कभी मोदी और एलजी पर ठिकरा फोड़ने का काम कर लिया जाता रहा है। यह ईडी के मामले में नहीं किया जा सता है। इसलिए आप का अस्तित्व संकट में लगता है।
(लेखक हिंदी पत्रकारिता फाउंडेशन के चेयरमैन हैं) संवाद इंडिया

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