‘बैठक’ के स्ट्रोक से कांग्रेस का प्रोपगंडा ‘फेल’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार का 9 साल का कार्यकाल पूरा हो गया। उसकी उपलब्धियों की जानकारी घर-घर पहुंचाने की योजना बनाने के लिए मध्यप्रदेश भाजपा की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक हुई।

सुरेश शर्मा, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार का 9 साल का कार्यकाल पूरा हो गया। उसकी उपलब्धियों की जानकारी घर-घर पहुंचाने की योजना बनाने के लिए मध्यप्रदेश भाजपा की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक हुई। यह बैठक ऐसा स्ट्रोक रही कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस के नेता, प्रवक्ता और सोशल मीडिया की टीम ने जो प्रोपगंडा फैलाया था वह एक बार में ही फेल हो गया। जिन नेताओं को प्रदेश के गांव-गांव तक के कार्यकर्ता को उत्साहित करके चुनाव मैदान में लगाना है वे जीतने की मानसिकता से लबरेज होकर गये हैं। जिन नेताओं में नाराजगी दिखी है उसका प्रतिनिधित्व करके कैलाश विजयवर्गीय ने उनमें उत्साह भर दिया जबकि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बता दिया कि कांग्रेस हमारे यहां नाराजगी तलाश रही है जिसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि संगठन में ऐसा मैकेनिज्म है जो इस प्रकार की स्थितियों को संभालता रहता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि कमलनाथ को भावी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की योजना की हवा निकाल दी गई है। इससे पहले इस योजना को खुद कांग्रेसी ही नकार चुके हैं। भाजपा ने पूरी ताकत के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम और शिवराज सिंह चौहान के काम के आधार पर जनता के बीच में जाने का तय किया है।

भाजपा के पास ताकतवर संगठन है। विचारधारा है। कर्नाटक के बाद देश का बहुसंख्यक मतदाता को यह पता चल गया कि एक समुदाय भाजपा को सरकार में आने से रोकने के लिए मतदान कर रहा है तब बहुसंख्यक समाज इसकी स्वभाविक प्रतिक्रिया करेगा और मतदान का प्रतिशत इस बार बढ़ेगा। इसलिए भाजपा के नेताओं का बड़ा समूह अपने-अपने क्षेत्र के लिए तैयार हो गया है। भाजपा प्रचार के दो दौर पूरे कर चुकी है। सरकार हितग्राहियों के सम्मेलन करके उनका पक्ष तैयार करके समर्थन में ला रही है। जबकि संगठन के नेताओं ने जनता के साथ निरन्तरता बना रखी है। सबसे लम्बे समय के मुख्यमंत्रत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता इसी से समझ में आती है कि वे इतने समय बाद भी जनता के बीच में अन्दर तक बेधडक़ जा रहे हैं। लोग तालियां बजाते हैं। वहीं कांग्रेस के एक पूर्व प्रवक्ता का वीडियो बताता है कि कांग्रेस में पिछले 42 साल से वही पांच-सात चेहरे कमान संभाले हैं। मतलब साफ है कि दो पीढिय़ों की नेतागिरी इन व्योवृद्ध नेताओं की लील ली है। इस आक्रोश को कांग्रेस भावी मुख्यमंत्री के नारे से थाम नहीं सकती है।

भाजपा का युवा नेतृत्व है। इसलिए बुजुर्गों की कही से नाराजगी की आवाज आती दिखती है लेकिन उनके साथ संवाद में कोई देरी नहीं हो रही है। सत्तन और बब्बू इसका उदाहरण हैं। शाम तक भाषा बदल जाती है। तभी वीडी शर्मा कहते हैं कि नाराजगी तो होती है लेकिन उसको संभालने का काम तुरन्त होता है। बड़ी पार्टी, अधिक लोग संभालना तो होता ही है। जब गुजरात की छाया कर्नाटक पर नहीं पड़ी तब कर्नाटक की छाया मध्यप्रदेश पर पड़ेगी ऐसा सोचना मन खुश करना है। जिनको करना है करे लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस के समर्थकों ने इतने दिन में जो वातावरण बनाने का प्रयास किया था एक बैठक में ही वह बिखर गया है। प्रोपगंडा फेल हो गया है।

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