विदिशा और गुना के प्रत्याशियों से कोई बड़ा संदेश नहीं दे पाई कांग्रेस

प्रदेश के लिए कांग्रेस को छह प्रत्याशी और घोषित करना थे लेकिन तीन करके तीन होल्ड पर रख लिए। खंडवा, ग्वालियर और मुरैना से कभी भी नाम आ सकते हैं। जिन तीन लोकसभा क्षेत्रों विदिशा और गुना से कांग्रेस ने जिनकाे प्रत्याशी बनाया है उनसे कोई ऐसा संदेश नहीं गया कि कांग्रेस प्रदेश में कोई चमत्कार करने के मूढ़ में है।

सुरेश शर्मा भोपाल। प्रदेश के लिए कांग्रेस को छह प्रत्याशी और घोषित करना थे लेकिन तीन करके तीन होल्ड पर रख लिए। खंडवा, ग्वालियर और मुरैना से कभी भी नाम आ सकते हैं। जिन तीन लोकसभा क्षेत्रों विदिशा और गुना से कांग्रेस ने जिनकाे प्रत्याशी बनाया है उनसे कोई ऐसा संदेश नहीं गया कि कांग्रेस प्रदेश में कोई चमत्कार करने के मूढ़ में है। वहीं भाजपा ने छिंदवाड़ा से अपने प्रत्याशी बंटी साहू का नामांकन दािखल करवाया तब एक साथ आकर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। साथ में कमलनाथ के साथ नेता के घर जाकर भी राजनीतिक चेतावनी भी नाथ परिवार को दे दी है। कुछ इसी प्रकार के संदेश की प्रदेश में कांग्रेस की ओर से भी जरूरत थी। लेकिन अभ्ाी तक ऐसा कोई संदेश देने की स्थिति नहीं बना पई है। अभ्ाी तो चुनावी एजेंडा भी तय नहीं हो पाया है जिससे प्रदेश में उसकी चर्चा हो सके।

मध्यप्रदेश भाजपा के तीन दिग्गज चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने किसी तगड़ी रण्ानीति की अपेक्षा सबको थी। खजुराहो पहले ही समाजवादी पार्टी को दे दी और उसने अभी तक प्रत्याशी ही घोषित नहीं किया है। यहां पर कांग्रेस के किसी संदेश की अपेक्षा भी नहीं की जा सकती थी। ऐसे में गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और विदिशा से शिवराज सिंह चौहान के सामने प्रत्याशी की चमक से प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाई। विदिशा से दो बार के सांसद प्रतापभानू शर्मा को टिकिट दिया गया है। उन्हें दर्जन भर चुनाव से दूर ही रखा गया था। कोई भाव इसलिए नहीं दिया क्योंकि उनका जमाना चला गया। अब उन्हें झाड़पूछ कर फिर से जनता के बीच चमकाने का प्रयास हुआ है। यह सीट पहले से ही भाजपा और विशेष कर शिवराज िसंह के प्रभाव वाली रही है। ऐसे में संदेश यह गया है कि कांग्रेस ने शिवराज को वाक ओवर दे दिया है। प्रताप भानू यदि जोर मारेंगे तो विदिशा में जहां कांग्रेस का पुरान विधायक भाजपा में आ गया है।

गुना कांग्रेस के लिए कुछ कर गुजरने वाली सीट है। सिंधिया पहले कांग्रेस के टिकिट पर गुना से ही चुनाव लड़ते थे। जीतते भी थे। पिछले चुनाव में चुनाव में भाजपा के केपी यादव से हार गये थे। इसलिए कांग्रेस ने यह सोच लिया कि यादव वोट सिंिधया के खिलाफ हैं। भाजपा के पुराने दिग्गज राव देशराज िसंह के बेटे को उनके सामने उतार दिया। वे पिछले समय तक भाजपा में ही थे। ऐसे में भाजपा यादव वोट कांग्रेस के पास जायेंगे या फिर सिंधिया को मिलेंे? अरूण यादव भी यादव होने के दम पर वहां से टिकिटमांग रहे थे। कांग्रेस ने दूसरा यादव तलाश लिया। दमोह इसलिए चर्चा में नहीं आ पा रहा है क्योंकि जहां अपेक्षा थी वहीं कुछ नहीं हुआ तो दमोह क्या कर लेगा? प्रदेश में कांग्रेस नया क्या करेगी यह तो संदेश गया नहीं छिंदवाड़ा को बचाने के िलए भी उसे तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा ने वहां जबरदस्त घेरेबंदी की ली है।

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