कमलनाथ की दुखती रग पर हाथ रखकर हिला गये सीएम डाॅ. मोहन यादव

सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव अामने-सामने आ रहे हैं। भाजपा यही चाहती है कि कमलनाथ छिंदवाड़ा की बात करें और सवालों में उलझते जायें। इसीलिए मोहन यादव ने छिंदवाड़ा में गड़बड़ है की गुगली फेंक दी थी।

सुरेश शर्मा भोपाल। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव अामने-सामने आ रहे हैं। भाजपा यही चाहती है कि कमलनाथ छिंदवाड़ा की बात करें और सवालों में उलझते जायें। इसीलिए मोहन यादव ने छिंदवाड़ा में गड़बड़ है की गुगली फेंक दी थी। अब कमलनाथ उसका उत्तर दे रहे हैं और सवालों का सिलसिला शुरू हो चला है। सोशल मीडिया पर बातें चल रही हैं तब दूर तलक जायेंगी। छिंदवाड़ा से नामांकन के समय भाजपा के नेताओं की एकता का संदेश गया जबकि एकता का संदेश कांग्रेस ने भी दिया है। उस समय भी मोहन यादव ने स्थानीय का कार्ड खेल दिया। कमलनाथ ने किसी भी छिंदवाड़ा वाले को आगे नहीं बढ़ाया और आज जवानी देने की बात कह रहे हैं?

भाजपा के पास केवल एक ही लोकसभा की सीट नहीं है। वह है छिंदवाड़ा। यहां से पूर्व सीएम कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ सांसद हैं। यह सीट अजीब है क्योंिक जनता लहर में भी यहां से कांग्रेस के गार्गीशंकर मिश्र चुनाव जीते थे। इंदिरा गांधी को यह सीट ऐसी पसंद आई कि अपने तीसरे कहे जाने वाले बेटे कमलनाथ को अगला चुनाव यहां से लड़ा दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में कमलनाथ की घर-घर में पैठ है। एक सुन्दरलाल पटवा ने यहां से चुनाव जीता था अन्यथा हर बार भाजपा हारी है। अब इस सीट पर भाजपा पूरी ताकत झोंक रही है।

कमलनाथ ने भी भाजपा की सदस्यता लेने का प्रयास किया है। इसकी चर्चा ने उनकी छवि को प्रभािवत किया है। इसलिए भाजपा ने बड़ा दाव खेला है। कमलनाथ के लिए सीट छोड़ने वाले दीपक सक्सेना के परिवार में सेंधमारी हो गई है। एक बेटा भाजपा का सदस्य हो चुका है। चर्चा तो यह भी है िक अप्रैल महीने में दीपक सक्सेना भी भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं। अमरवाड़ा विधायक के भी भाजपा में आने की चर्चा है। इसलिए छिंदवाड़ा की राजनीति खासी चर्चित हो चुकी है। ऐसे में सीएम के बयान ने वहां और गर्मी ला दी है। स्थानीय का मुद्दा प्रभावशाली रूप से सामने आ रहा है।

डा. मोहन यादव ने कहा कि छिंदवाड़ा में गड़बड़ है क्योंकि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना व्यापार साम्राज्य बढ़ाया है। किसी भी क्षेत्रीय नेता को संसद में नहीं भेजा, मौका आया तो पत्नी को अौर बाद में बेटे को। अबकी बार छिंदवाड़ा का बेटा चुनाव जीतना चाहिए। कमलनाथ ने इमोशनल कार्ड खेला और कहा कि उन्होंने अपनी जवानी छिंदवाड़ा के विकास के लिए लगा दी है। अब सोशल मीडिया पर बातें चल रही हैं। क्षेत्र की जनता नेताओं के बयानों का आनंद ले रही है। एक बार तो ऐसा लग रहा है कि छिंदवाड़ा को लेकर अमित शाह की विशेष रणनीति चमत्कार दिखा रही है। जनता में भी असर दिखाई दे रहा है। परिणाम पर सबकी निगाह है। ऊंट किस करवट बैठेगा?

अपनों के बीच ही संदिग्ध हो गये हैं कमलनाथ प्रतिष्ठा दाव पर लगी

राजनीति के जानकार यह मान रहे हैं कि छिंदवाड़ा कांग्रेस के लिए आसान स्थान रहा है। वहां से जीत की राह कभी कठिन नहीं रही है। इस बार भाजपा ने काफी समय पहले ही जीत की राह देख ली थी। हालांकि विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में एक भी विधायक भाजपा के खाते में नहीं आया था। फिर भी लोकसभा में जीत की आस बरकरार बनी हुई है। भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं में सेंधमारी करने का निर्णय लिया और वह खासा असरकारी रहा है। कमलनाथ उम्र के इस पड़ाव में भाजपा में जाने की सोचने लगे थे लेकिन वह कदम उनकी प्रतिष्ठा को हिला गया। अब भरोसा कम हुआ है। इस कारण बेटे का राजनीतिक कैरियर प्रभावित हो गया है। इस चुनाव के बाद नाथ परिवार और छिंदवाड़ा की समीक्षा होन लगेगी।

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