G-7 के मंच से जारी बयान पर तिलमिला उठा चीन? क्वाड नेताओं ने भी आग में डाला घी

नई दिल्ली
जापान के हिरोशिमा में G-7 देशों ने एक साझा बयान जारी कर चीन का नाम लिए बिना उस पर सख्त तेवर दिखाए हैं। एक तरफ जहां G-7 देशों ने यूक्रेन युद्ध खत्म को खत्म कराने के लिए चीन को रूस पर दबाव बनाने के संदेश दिए तो दूसरी तरफ हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने और ताइवान का सम्मान करने की भी नसीहत दी है। इस बयान से चीन तिलमिला उठा है। बीजिंग ने इस बयान का विरोध किया है।

G-7 देशों की बैठक से इतर क्वाड देशों (भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक समूह जिसे क्वाड के रूप में जाना जाता है) ने भी शनिवार को  हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का संकल्प लिया और चीन का नाम लिया  बिना बलपूर्वक यथास्थिति में बदलाव की किसी भी कोशिश या एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया। क्वाड नेताओं ने एक संयुक्त बयान में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की "सीमा पार आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों" की निंदा की। बयान में मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले और पठानकोट में भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर हुए हमले का भी जिक्र किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और समूह में उनके तीन सहयोगियों ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बनीस, जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन  “हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता” के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया उसका निशाना स्पष्ट रूप से चीन पर था। चीनी के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि  दक्षिणी चीन सागर से जुड़े मामले, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों में दखल देने के आरोपों समेत कई मामलों में बीजिंग को निशाना बनाया गया है। ड्रैगन की ओर से कहा गया है कि जी7 ने उसकी चिंताओं की परवाह नहीं की। इसके साथ ही ताइवान समेत उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया गया है।

क्वाड नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। क्षेत्र में चीनी सेना की आक्रामक गतिविधियों के बीच, क्वाड नेताओं ने कहा, ''हम अस्थिरता या एकतरफा गतिविधियों का कड़ा विरोध करते हैं, जिनमें यथास्थिति को जबरन बदलने की कोशिश की जाती हो।'' नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के महत्व पर भी जोर दिया, विशेष रूप से जैसा कि समुद्री कानून से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संधि में परिलक्षित होता है। उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की स्पष्ट रूप से निंदा की।

 

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