अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने 25 बेसिस प्वाइंट से बढ़ाईं ब्याज दरें

न्यूयोर्क
अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US federal Reserve) ने ब्याज दरों को 25 बेसिस प्वाइंट से बढ़ाने का ऐलान किया है. फेड के सभी सदस्यों ने ब्याज दरें बढ़ाने के फैसले पर एकमत से अपनी मंजूरी दी है. साथ ही बैंक की ओर से यह भी इशारा किया गया है कि आगे अब ब्याज दरों को नहीं बढ़ाया जाएगा.

फेडरल रिजर्व की इस प्रकार की नीति पर बाजार को पहले से ही अंदेशा था कि इस बार भी ब्याज दरों को बढ़ाए जाने की घोषणा होगी. गौरतलब है कि पिछले साल मार्च से शुरू हुई ब्याज दरों में ये 10वीं लगातार बढ़ोतरी रही है. इसके बाद फेड का फंड रेट टारगेट रेंज के 5%-5.25% पर आ गया है, जो कि अगस्त 2007 के बाद सबसे ज्यादा है. अब बाजार को चौथाई परसेंट की इस बढ़ोतरी का अनुमान पहले से था, लेकिन निगाहें फेड की कमेंट्री और आउटलुक पर थी, जिसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिला.

फेड का दरों को थामने का इशारा
फेड की बैठक के बाद जारी बयान में उस एक लाइन को हटा दिया गया जिसका जिक्र मार्च की पॉलिसी किया गया था, जिसमें फेड ने कहा था कि 'कमिटी का अनुमान है कि फेड के 2% महंगाई के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ अतिरिक्त नीति निर्धारण की उपयुक्त हो सकते हैं.' इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि फेड भी चाहता है कि अब दरों में बढ़ोतरी का चक्र खत्म किया जाए, और इसीलिए फेड अगली आने वाली पॉलिसी में दरों को 'Pause' कर सकता है.

बैंकिंग संकट पर फेड
हालांकि बाजार को उम्मीद इस बात की भी थी कि फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल मई की पॉलिसी में ही दरों को थामने का ऐलान करेंगे, क्योंकि इस साल अमेरिका में संभावित हल्की मंदी का अनुमान जताया जा रहा है और दूसरी ओर बैंकिंग संकट एक बार फिर गहराने लगा है.सिलिकॉन वैली बैंक, सिग्नेचर बैंक और अब फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के बंद होने के बावजूद फेड ने महंगाई को ज्यादा तवज्जो दी और दरों में इजाफा किया.

फेडरल रिजर्व की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 'अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम मजबूत और लचीला है. घरों और बिजनेस के लिए सख्त कर्ज की शर्तों का आर्थिक गतिविधि, हायरिंग और महंगाई पर असर पड़ सकता है. ये प्रभाव किस सीमा तक होंगे ये अनिश्चित है. ये कमेटी महंगाई के जोखिमों को लेकर काफी चौकस है.'

बयान की भाषा में इस बदलाव को फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने 'अर्थपूर्ण बदलाव' कहा है. उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी बैठक में दरों की बढ़ोतरी को रोकने पर कोई चर्चा नहीं की गई, लेकिन जून की पॉलिसी में इस पर चर्चा हो सकती है.

तो फिर अमेरिकी बाजार क्यों गिरे?
अब सवाल उठता है कि सबकुछ बाजार की उम्मीद के मुताबिक ही है, तो ये गिर क्यों गए. पॉलिसी से पहले डाओ जोंस अच्छी मजबूती के साथ कामकाज कर रहा था, लेकिन पॉलिसी पर कमेंट्री से ये फिसलता चला गया. दरअसल, पॉलिसी की बैठक के बाद जब फेड चेयरमैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उनसे पॉलिसी रेट पॉज पर कई सवाल पूछ गए, लेकिन उनका जवाब था कि वो डेटा के आधार पर ही फैसला करेंगे, कि आगे क्या करना है. और इस बात पर भी जोर दिया कि महंगाई अब काबू में करना बाकी है.

ये बात बाजारों को शायद पसंद नहीं आई. ऐसा नहीं है कि जेरोम पॉवेल डेटा के आधार पर फैसला करेंगे वाला बयान पहली बार आया है. इसके पहले भी कोविड के दौरान से ही ये कहते आए हैं. पॉवेल के मुंह से रेट पॉज को लेकर कुछ साफ सुनने को नहीं मिला तो बाजार कन्फ्यूज हो गए और गिर पड़े.

लेकिन इस दौरान पॉवेल ने एक बात जरूर साफ कर दी कि अमेरिका में मंदी की आशंका जो पहले जताई जा रही थी, उससे उन्होंने इनकार कर दिया और कहा कि मंदी को लेकर कोई आशंका नहीं दिखती है.

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