शिवराज, सिंधिया और नाथ की सीटों पर सबकी नजर

मध्यप्रदेश की तीन लोकसभा सीटें वीआईपी सीट हो चुकी हैं। इनके परिणाम और गतिविधियों पर नजर और चर्चा रहने वाली है। भाजपा के प्रत्याशी विदिशा से शिवराज सिंह और गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा कांग्रेस के बड़े नेता के पुत्र नकुल नाथ इसमें शामिल हैं।

सुरेश शर्मा, भोपाल।। मध्यप्रदेश की तीन लोकसभा सीटें वीआईपी सीट हो चुकी हैं। इनके परिणाम और गतिविधियों पर नजर और चर्चा रहने वाली है। भाजपा के प्रत्याशी विदिशा से शिवराज सिंह और गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा कांग्रेस के बड़े नेता के पुत्र नकुल नाथ इसमें शामिल हैं। मीडिया की समीक्षा में सबसे अधिक चर्चा छिंदवाड़ा लोकसभा की ही होना है जहां से नकुलनाथ को घेरने के प्रयास भाजपा हायकमान की ओर से ही हो रहे हैं। अभी सर्वे नाथ के पक्ष में ही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी परम्परागत सीट से मैदान में आये हें। विदिशा से शिवराज का पुराना संबंध है। इसका मतलब यह हुआ कि भाजपा उनका अन्य क्षेत्रों में उपयोग करना चाह रही है। फिर भी वे खबरों में रहने वाले हैं। उनकी जीत पर कोई संशय नहीं है इसलिए कांग्रेस भी कोई चेहरा देने जैसा विचार नहीं कर रही है। ऐसा ही हाल गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर है। अभी कांग्रेस ने सिंधिया के सामने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। कांग्रेस अध्यक्ष रहे अरूण यादव की बयान आया था कि वे गुना से लड़ना चाहते हैं। इसका कोई मतलब नहीं है। वे ऐसी ही हिम्मत दिखाकर शिवराज से भिड़कर हार चके हैं।

सिंधिया की सीट पर टेढ़ी नजर दिग्विजय सिंह की भी है। वे भी सिंधिया से राजनीतिक बदला लेना चाहते हैं। इसलिए उनके सामने चुनौती पेश करने का प्रयास करेंगे। लेकिन मोदी का मैजिक और सिंधिया का प्रभाव अब साफ दिखाई देने लग चुका है। सिंधिया यहां पिछली हार का बदला ले लेंगे। गुना के सांसद केपी यादव इस समय चुप हैं। उन्हें भाजपा ने टिकिट नहीं दिया तब वे कांग्रेस से अपना भाग्य आजमा सकते हैं। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस की संभावना केवल छिंदवाड़ा में ही दिखाई दे रही है। उसको भी छीनने के लिएए भाजपा की तगड़ी रणनीति बनी चुकी है।

छिंदवाड़ा के लिए कमलनाथ ने पूरी ताकत झौंक दी है। यह सीट 1977 की लहर में भी कांग्रेस के पास ही रही है। गार्गीशंकर मिश्र ने यहां से जीत हािसल की थी। इसी के बाद इंदिरा जी ने अपने तीसरे पुत्र कमलनाथ को यहां का साम्राज्य सौंप दिया था। वे और उनका परिवार यहां से रम सा गया और संसदीय प्रतिनिधित्व कर रहा है। अभी तक के इतिहास में सबसे कम वोटों से नाथ परिवार के किसी सदस्य की जीत 2019 में हुई थी। अब युवा चेहरा विवेक साहू बंटी को उतारा गया है। इस  रणनीति की खूब चर्चा होने वाली है। सबकी नजर टिक गई है।

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