5 दिन बाद नक्सलियों ने कमांडो राकेश्वर सिंह को रिहा किया

रायपुर ( विशेष प्रतिनिधि)। जोनागुडा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में बंधक बनाए गए सी आर पी एफ के कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को 5 दिन बाद नक्सलियों ने रिहा कर दिया। कल ही यह जानकारी सामने आई थी कि राकेश्वर सिंह सुरक्षित है। नक्सलियों ने खुद मध्यस्था की मांग की थी। लेकिन अभी यह सामने नहीं आ पाया है कि मध्यस्थ कौन थे और किन शर्तों को सरकार ने माना? जिसके कारण राकेश्वर सिंह की रिहाई हो पाई है।

बस्तर जिले के जोनागुडा क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच घेराबंदी और मुठभेड़ का दौर चल रहा था जिसमें सीआरपीएफ के 23 जवान शहीद हो गए थे यह भी जानकारी आई है कि नक्सलियों को भी इस मुठभेड़ में भारी नुकसान पहुंचा है लेकिन एक लापता जवान राकेश्वर सिंह बंधक बना लिए गए थे। छत्तीसगढ़ सरकार उसी के बाद से हरकत में आई थी। केंद्रीय गृहमंत्री चुनाव प्रचार छोड़कर छत्तीसगढ़ पहुंचे और उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहां उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन भी किया गया। इसके बाद गृहमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि यह अभियान परिणाम निकलने के बाद ही समाप्त होगा।

एक क्षेत्रीय पत्रकार के पास नक्सलियों का संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें राकेश पर सिंह के जिंदा होने की बात की गई थी। बाद में जवान का चित्र भी नक्सलियों ने पत्रकार के मोबाइल पर भेजा। यह राष्ट्रीय खबर बनी। इस जानकारी के बाद राकेश्वर की पत्नी मीनू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि उनके पति को सुरक्षित वापस लाया जाए। जवान की मां कुंती देवी ने भी इसी प्रकार की अपील की। यह भी कहा गया कि पाकिस्तान से जब जवान मनोरंजन सकुशल वापस आ सकता है तब नक्सलियों के कब्जे से राकेश्वर सिंह क्यों नहीं आ सकते?

नक्सलियों ने सरकार से मध्यस्थ घोषित करने की मांग करते हुए कमांडो को रिहा करने का वादा किया था। हालांकि सरकार की तरफ से कोई नाम घोषित नहीं किया गया। इसके बाद यह खुशी भरा समाचार आया कि नक्सलियों ने राकेश्वर सिंह को रिहा कर दिया है और वे फोर्स केम्प में आ गए हैं। उनका मेडिकल परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें रायपुर भेजा जाएगा। पत्रकारों ने केम्प जाकर बातचीत करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। हालांकि कुछ चर्चित चेहरों ने नक्सलियों से बात करके जवान को छोड़ने के का आग्रह किया था। लेकिन कौन मध्यस्थ बना और क्या शर्ते नक्सलियों की मानी गई है इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है?

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