22 मंत्री नहीं बचा पाए पार्टी की लाज

विधानसभा 2018 और लोकसभा 2019 का अंतर
भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] मुख्यमंत्री कमलनाथ के कुनबे के 22 मंत्री लोकसभा चुनाव में अपनी सीट नहीं बचा पाये। उनके क्षेत्र में भाजपा ने खासी मार्जिन से अपने प्रत्याशियों को जिताया था। सबसे खास बात यह है कि मंत्रीमंडल के क्रम में पहले 11 मंत्रियों में से केवल दो आरिफ अकील और लाखन सिंह यादव ही अपनी सीट को बचा पाये हैं। बाकी अधिकांश मंत्री कमलनाथ के दावे को संभाल नहीं पाये। कमलनाथ ने कहा था कि जो अपनी सीट नहीं बचा पायेगा उसकी समीक्षा की जायेगी। वैसे भी प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ ही मात्र अपनी परम्परागत सीट को बमुश्किल बचा पाये हैं नहीं तो सिंधिया और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज भी चुनाव हार गये हैं।
पांच महीने पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जनादेश मिला था। हालांकि यह जनादेश खंडित था। विधानसभा त्रिशंकु बनी थी लेकिन जोड़तोड़ से सरकार बनाने की सफलता कांग्रेस को मिली। वैसे भी उसे सबसे अधिक 114 सीटें मिली थीं जो  सरकार बनाने के करीब थीं। लेकिन लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की ऐसी आंधी चली कि कांग्रेस यहां पत्ते की तरह उड़ गई। जिन सीटों के बारे में यह माना जा सकता है कि यह तो कांग्रेस जीतेगी ही उनमें से एक गुना से महल का महाराज अपने ही पुराने साथी से हार गया। इस हार ने कांग्रेस की राजनीति में भूचाल ला दिया।
लोकसभा के चुनाव के परिणाम को देखते हैं तब यह उभर कर आता है कि पहली पांत के 11 मंत्रियों में से महज दो ही जीत दर्ज करा पाये और अपनी विधानसभा को संभाल पाये। नम्बर एक की मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ 45 हजार से अपनी सीट हारी, डा. गोविंद सिंह जो अजेय हैं 17 हजार का गच्चा खा गये। सज्जन सिंह वर्मा 46 हजार से नीचे चले गये। हुकुम सिंह कराड़ा का क्षेत्र 25 हजार से पीछे हो गया। गृहमंत्री खुद ही टप्पे मार कर जीते थे लेकिन लोकसभा में 23 हजार से पीछे रहे। निर्दलीय मंत्री 25 हजार से अपनी सीट हार गये। इंदौर में तूफान आया था इसलिए जीतू पटवारी अपनी सीट 80 हजार से हारे और तुलसी सिलावट की सीट 67 हजार से पीछे रह गई।
भोपाल से मुस्लिम बहुल सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले आरिफ अकील जीत का परचम लोकसभा में भी फहराते दिखे जबकि दूरे मंत्री पीसी शर्मा  जीते 65 सौ से अधिक से थे लेकिन अब लोकसभा में 46 हजार से अपनी हार गये। वित्तमंत्री तरूण भानोट जिन्हें कमलनाथ का खास कहा जाता है वे अपनी सीट पर भाजपा को 84 हजार की बढ़त दे बैठे।
ऐसा नहीं है कि पांच मंत्री ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी सीट पर बढ़त बनाये रखी है। आरिफ अकील का हम उल्लेख कर ही चुके हैं। लाखन यादव 3 हजार वोट की बढ़त दे पाये। श्रीमती ईमरती देवी और ओंकार सिंह मरकान ने 18 हजार की बढ़त बनाने में कामयाबी हासिल की। उमंग सिघार 11 हजार से और सुरेन्द्र हनी 35 हजार से बढ़त लोकसभा में अनाने में कामयाब हो पाये हैं। बाकी 22 मंत्री आज विश्वास के संकट में आकर फंस गये।
काांग्रेस में इस बात का मंथन चल रहा है कि जिन विधायकों ने अपने क्षेत्र में लोकसभा का चुनाव जितवाने में कामयाबी हासिल की है उनको क्या सरकार में शामिल किया जाये? लेकिन अल्पमत की सरकार होने के कारण इतना बड़ा जोखिम उठाने की स्थिति में कमलनाथ नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने खुद ही कहा था कि जिस मंत्रियों के चुनाव क्षेत्र में कमजोरी रहेगी उन्हें मंत्री बनाये रखना है या नहीं इसकी समीक्षा की जायेगी। अब कमलनाथ अपने कह पर कितना ध्यान देते देंखते हैं। यह प्रदेश में कांग्रेस का अच्छा दौर नहीं है और सरकार बनने पर सवाल उठना लाजमी हैं।

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