2 लाख वोट घटे जीत का अंतर 1.91 कम

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि। खंडवा लोकसभा चुनाव में हार-जीत का अंतर 82 हजार से अधिक है। लेकिन यह नंद कुमार सिंह चौहान की जीत से काफी कम है। इसको लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में गणित लगाये जा रहे हैं कि भाजपा की क्षेत्र में लोकप्रियता घटी है। देश में तीन उपचुनाव हुए थे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस 7490 वोटों से जीती है जबकि दादर हवेली में जीत 51 हजार के आसपास रही है। इस हिसाब से मध्यप्रदेश में जीत का आकंड़ा सबसे अधिक है। इसके बाद भी समीक्षा की जा रही है कि भाजपा की जीत का आंकड़ कम हुआ है। उपचुनाव में आम चुनाव जैसा न तो मतदान होता है और न ही रूचि ही रहती है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस के प्रत्याशी राजनारायण पूरनी को अरूण यादव की तुलना में 15 हजार 251 वोट कम मिले हैं। जबकि नंदू भैया की तुलना में ज्ञानेश्वर पाटिल को 2 लाख 6 हजार 454 वोट कम मिले हैं। जीत का अन्तर 1 लाख 91 हजार 203 वोट का है। जबकि मतदान 1 लाख 99 हजार 546 वोट कम रहा है। ऐसे में जीत का अन्तर महत्वपूर्ण हो जाता है। कांग्रेस की यह दावेदारी महत्वपूर्ण नहीं है कि उसने भाजपा की जीत की लीड को कम कर दिया है। वस्तुत कांग्रेस को मिलने वाले वोट भी घटे हैं। ऐसे में उपचुनाव का समीकरण साफ हो जाता है कि भाजपा की ताकत को खंडवा में कम नहीं आंका जा सकता है।
राजननीतिक रूप से देखा जाये तो यह पक्ष भी मायने रखता है कि स्थानीय और अनुभवी प्रत्याशी कांग्रेस द्वारा दिये जाने के बाद भी वोटों की संख्या में कमी आना विचार करने को प्रेरित करता है। नंदू भैया के परिवार से बाहर और प्रभावशाली नेता अर्चना चिटनिश की की टिकिट को काटकर भाजपा ने नये कार्यकर्ता पर दांव लगाया था। यहां इतने अन्तर से जीतकर भाजपा ने अपने संगठन की ताकत को दिखाया है। इस प्रकार की ताकत रैगांव में नहीं दिखाई जा सकी। वहां भाजपा अपेक्षा से अधिक वोटों से चुनाव हार गई।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता और जन विश्वास पर मुहर लगी है तो संगठन ने सभी परिस्थितियों को संभालकर जीत दिलाई यह भाजपा के खाते में जाने वाली बात है।

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