‘होर्डिंग’ पर फोटो से अधिक प्रचार पा गए ‘दिग्गी’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। कई बार लगता है कि नये नेताओं को प्रचार की राजनीति करने के गुर दिग्विजय सिंह से सीखने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में यह कहा जाता है कि वे मीडिया और खासकर सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक चर्चा में आयें इसका प्रयास करते रहते हैं और सत्र्तक भी रहते हैं। लेकिन वे बिना कुछ किये दिग्विजय सिंह जितना प्रचार पा जाते हैं उससे मुकाबला नहीं कर पाते हैं। पिछले दिनों से दिग्विजय सिंह का एक पत्र मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पत्र में दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को लिखा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ा यात्रा के मध्यप्रदेश में पहुंचने के वक्त जो होर्डिंग लगेंगे उनमें उनका फोटो नहीं लगाया जाये। बाकायदा उन्होंने यह भी लिखा है कि इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खडगे के साथ आपका फोटो लगना चाहिए। खुद के बारे में फोटो न लगाने के इस पत्र के बाद इतनी चर्चा हो गई कि वे सुर्खियां बटोरने लग गये हैं। मीडिया चर्चाओं में यह विषय लगभग चैनलों पर आ चुका है। समाचार पत्रों में चार से पांच कालम के समाचार बन चुके हैं। यह सब तो तब है जब यात्रा को दिसम्बर में मध्यप्रदेश में आना है। इससे पहले यह पत्र हर बार संदर्भ का विषय बनता रहेगा। तुर्रा यह कि कांग्रेसी कह रहे हैं कि यह तो दिग्विजय सिंह की महानता है कि वे प्रचार से खुद को दूर रखना चाहते हैं।

यह सच है कि दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के चर्चित चेहरों में से एक हैं। वे सबसे लोकप्रिय हों या न हो लेकिन चर्चा में चर्चित रहते हैं। संघ मामलों में उनके कथन देशव्यापी चर्चा उन्हें दिला रहते हैं। फिर चाहे चर्चा सकारात्मक हो या आलोचनात्मक हो। वे बिना किसी कारण लिखी जाने वाली चि_ियों के कारण भी चर्चा का केन्द्र पा लेते हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा दिसम्बर में महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश में बुरहानपुर जिले से प्रवेश करेगी। प्रदेश के समाचार पत्रों में राहुल की इस यात्रा को अधिक प्रचार नहीं मिल रहा है। महाकाल मंदिर में दर्शन और सभा को प्रधानमंत्री की सभा से तुलना करते हुए भी समाचार इसलिए छपे हैं क्योंकि राहुल की सभा की तुलनलात्मक चर्चा करके आने वाले वक्त की राजनीति की पटकथा लिखी जा सके। राहुल से अधिक तो दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में प्रचार पा लिया। अब होर्डिंग में फोटो लगे या न लगे। इसलिए राजनीति के छात्रों को किस प्रकार से प्रचार पाया जा सकता है और बेमौके प्रचार कैसे पाया जा सकता है इसके लिए दिग्विजय सिंह की कार्यशैली के बारे में जरूर अध्ययन करना चाहिए।

हालांकि कांग्रेस के नेताओं के सामने यह समस्या है कि वे इस कार्य के लिए दिग्विजय सिंह को एक महान नेता के रूप में एक बार से अधिक उल्लेख नहीं कर सकते? ऐसा करने से कमलनाथ के खफा होने की संभावना अधिक प्रबल हो जाती है। यह कांग्रेस की समस्या नहीं है आज की राजनीति की सबसे बड़ी समस्या यही है। अनेकों अवसरों पर भाजपा के प्रवक्ताओं को भी अधिक समय तक शिवराज की तारीफ करते रहने के साथ कोई न कोई विकल्प निकाल कर नरेन्द्र मोदी की तारीफ भी करना होती है। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि दिग्विजय सिंह ने भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी से अधिक प्रचार पा लिया है।

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