हजारों का निवेश और लाखों का चंदा डूब गया

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि । जिस उत्साह से हॉकर कार्नर बनाये गये थे उससे अधिक उत्साह से उन्हें तोडऩा शुरू कर दिया गया है। जिन गरीबों ने आवंटन की सिफारिश दो या तीन लाख रुपये की भेंट चढ़ाकर करवाई थी और उन्हें स्थान आवंटित हुआ था वे अब रो रहे हैं। उनका हजारों का निवेश भी पानी में बह गया। दीनदयाल का अन्त्योदय आंसू बहा रहा है लेकिन मुफ्त का डाकरने वाले नेता खुश हैं। यह कहानी है एमपीनगर के उस कार्नर की जिसको भाजपा नेताओं ने हटवाया या विधायक ने, इसको लेकर जंग चल रही है। लेकिन विधायक का इसमें कोई हाथ होगा इसका कोई प्रमाण नहीं मिल पाया है।

एमपी नगर का हॉकर कार्नर नगर निगम के अमले ने हटा दिया। उसी ने पहले की योजना के अनुसार बनाया भी था। तब भी शिवराज की सरकार थी और आज भी शिवराज की ही सरकार है। हां नगरीय निकाय मंत्री आज भूपेन्द्र सिंह हैं जिन्हें पार्टी थिंक टैंक के रूप में पेश करने का विचार कर रही है। दीनदयाल जी का अन्त्योदय गरीबों के हॉकर में दिखाई देता था उसको तोडऩे का कार्य एमपी नगर से शुरू हो गया है। जल्द ही ग्यारह नम्बर का हॉकर कार्नर तोडऩे की खबर आ सकती है। लेकिन वे गरीब अब सवाल पूछ रहे हैं कि मुफ्त में भाजपा के कुछ स्थानीय नेता चाट जाते थे। संरक्षण का आश्वासन देते थे। अब किसके पास जाएं? अब वे रो-रो कर कह रहे हैं कि निगम ने कहा था कि स्थानीय पार्षद से अनुशंसा करवा कर लाइये। यह अनुशंसा दो या तीन लाख रुपये की पड़ी थी। इन गरीबों के आसूं इसका प्रमाण हैं। वह भाजपा का कार्यकर्ता भी इसका प्रमाण है जिससे कहा गया था कि हरेक से तो तीन लाख में अनुशंसा की थी तुम पुराने साथी हो दो ही दे दो। अब इन गरीबों के आंसू कौन पूछे?

सुना यह भी गया है कि यह भाजपाईयों की स्थानीय लड़ाई है इसलिए मंत्री भूपेन्द्र सिंह को कार्नर हटाने का अनुरोध किया था। आग्रह के कच्चे सिंह ने तुड़वा ही दिया। यह भी नहीं सोचा की भाजपा के महापुरूष दीनदयाल जी क्या सोचेंगे? एक हाट दुकान का गुस्सा सभी पर टूटेगा यही तो राजनीति होती है। अब तो केवल यह देखना है इन गरीबों के आंसू पूछने कौन आयेगा?

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