सेहत का खजाना है जल्द उठना

शिखर वाणी फिचर डेस्क । भारतीय संस्कृति और संस्कारों में जिस प्रकार की जीवन पद्यति का वर्णन किया गया है उसके अनुसार मनुष्य का जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठने को सबसे पहला और बड़ा महत्व दिया गया है। ब्रह्म मुर्हुत के समय उठने का अपना महत्व है। इससे मनुष्य को न केवल व्याधियों से मुक्ति मिलती है अपितु उसकी प्रगति का सूचकांक भी इससे अधिक रहता है। इसलिए यह कहा गया है कि सूर्योदय से पहले उठने वाला व्यक्ति अधिक भाग्यवान होता है। वह परिश्रमी भी होता है। उसके मन मस्तिक में आलस्य सवार नहीं होता। मन में संत प्रवृत्ति का विकास होता है। इस प्रकार के समाज में विकासशीलता रहती है और आपसी सामंज्यस बना रहता है। यही कारण है आज भी भारत के हिन्दूत्व को सबसे अधिक वैज्ञानिक और व्यवहारिक जीवन पद्यति माना गया है। किसी एक भी क्रम को तोडऩे का परिणाम तत्काल सामने आ जाता है। इसलिए सुबह जल्द उठने के अनेकों फायदे बताये गये हैं।

यह विषय वैज्ञानिक आधार लिये है। हम देवताओं के चित्र देखते हैं। उनके सिर के पीछे एक प्रतिभा का चित्र दिखाई देता है। जिसे आभामंडल कहा जाता है। विद्वान कहते हैं यह सभी मनुष्यों के पीछे रहता है लेकिन दिखाई नहीं देता। इसके कई कारण हैं। सूर्य की आभा विश्व में सबसे अधिक तेज होती है। सूर्योदय के पश्चात उठने वाले व्यक्ति का आभामंडल सूर्य के तेज के सामने कमजोर हो जाता है या नष्ट हो जाता है। ऐसा व्यक्ति दिन भर सुस्त या काम से जी चुराता हुआ दिखाई देता है। उसके पास पूरा दिन काम के साथ बिताने का विजन भी नहीं रहता है। वह नौकरी करे तब भी अपने बॉस के सामने डांट खाता ही दिखाई देता है और यदि वह अपना काम करता है तब उसमें अपेक्षा से कम मुनाफा कमाता है। इस परिस्थिति को सूर्योदय से पहले उठकर समाप्त किया जा सकता है। यह समझने और मानने की बातें होती हैं। इस पर बहस करने वाला व्यक्ति भी इसी प्रकार की श्रेणी में समा जाता है और उसकी प्रगति भी बाधा से ग्रस्त हो जाती है। इसलिए सुबह सूर्योदय से पहले उठने की आदत को स्वीकार करना चाहिए।

सुबह जल्द उठने के अनेकों फायदे हैं। सुबह पांच बजे से आठ बजे का समय ऐसा होता है जब हमें कोई भी डिस्टर्ब करने वाला नहीं होता है। छात्र इस समय पर पढक़र अधिक याद कर सकते हैं। आम व्यक्ति ऐसे समय का उपयोग अपना दिन भर का विजन तैयार करने के लिए ला सकता है। यह समय आमतौर पर योग, सैर और स्वास्थ्य के लिए उपयोग में लाने के लिए उपयुक्त होता रहा है। आज की इस भागदौड़ की जिंदगी में डाक्टरों की यही सलाह रहती है कि सुबह जल्द उठकर सैर पर जाइये। अब तो तेज चलने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि इसका सुझाव मानसिक कार्य अधिक करने वाले लोगों के लिए होता है शारीरिक मेहनत करने वालों को सैर करने के लिए ही कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में दैनिक क्रियाओं से मुक्त होने के बाद सैर और व्यायाम करना शरीर को स्वस्थ्य रखने और मानसिक विकास के सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह वायु का शुद्ध होना और आक्सीजन की मात्रा अधिक होने के साथ ही प्रदूषण का अभाव शरीर को अधिक सक्षम बनाता है। मानसिक रूप से व्यक्ति ताकतवर हो जाता है। जब आप घर से बाहर निकल कर टहल कर आते हैं तब विचारों में बदलाव आता है और आमतौर पर व्यक्ति खुद को अधिक सक्रिय और तरोताजा महसूस करता है। इसलिए सुबह उठने का यह पहला फायदा है। इसी मन की शुद्धि के कारण दिन भर काम करने में रूचि भी बनी रहती है।

इस बारे में छात्रों पर अध्ययन किया गया है। उसमें यह पाया गया है कि जो छात्र जल्दी उठते हैं वे देर से उठने वालों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करते हैं। उनके पास समस्याएं कम होती हैं और उनका समाधान करने की क्षमताएं उनमें अधिक होती है। एक विदेशी विश्वविद्यालय के 300 छात्रों पर ऐसा अध्ययन किया गया था जिसके परिणाम प्रकाशित हुए हैं। ऐसा व्यक्ति या छात्र मानसिक रूप से ताकतवर होता है। यह व्यक्ति दिन के नियंत्रण में आने की बजाए दिन को अपने नियंत्रण में रखता है। सुबह जल्द सोकर उठने वाले मानसिक ताकत के साथ भावनात्मक, अध्यात्मिक और शारीरिक रूप से भी ताकतवर होते हैं। ऐसे लोग वे होते हैं जो एक्सरसाइज करते हैं। आजकल तो योग ने एक्सरसाइज का स्थान लेना शुरू कर दिया और जिम का चलन शुरू हो गया है। फिर भी सुबह उठने का प्रभाव व्यक्ति को स्वमेव ही मिल जाता है।

सुबह जल्दी उठने के कारण आपको काम करने का अधिक समय मिलता है और मूल कार्य के वक्त में हस्तक्षेप करके उसे खत्म करने का समय नहीं लगता इसलिए भी आपके लिए अपने मूल काम करने का अधिक समय मिलता है। आप व्यवसाय करते हैं तब जल्दी जगने के कारण आपको व्यवसाय का पूरा समय मिलता है। छात्र को क्लास और टयूशन के लिए पर्याप्त समय मिलता है इससे रूचि का विस्तार होता है और अगले दिन के लिए स्वस्थ्य मानसिकता केे साथ काम करने की मंशा बनी रहती है। इसिलए सुबह उठने के अनकों का सहज फायदे हैं जो हमें प्रेरित करते हैं। जिन भी व्यक्तियों में सुबह जल्द उठने की आदत नहीं है उन्हें जल्द उठाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे हम मानव धर्म का पालन करेंगे और भारतीय संस्कृति को अधिक प्रभावी विश्व की प्रिय संस्कृति बनाने में अपना योगदान भी देंगे।

अब हमें याद करना होगा कि भारत की ऋषि परम्परा सुबह चार बजे उठने की रही है। यहां यह भी है कि हम शाम को जल्द सोते हुए उनको देखते रहे हैं। आज मोबाइल के युग में इसका लोप हो रहा है। जबकि ऋषि मुनि चाहे मोबाइल रखते हों लेकिन वे खुद को मोबाइल का प्रभाव डालने नहीं देते। यह उनकी आत्मशक्ति का प्रतीक है। वे सामान्य व्यक्ति के जागने से पहले भगवान की अराधना कर चुके होते हैं। यह भारतीय संस्कृति और जीवन पद्यति का दूसरा पड़ाव है। हम आज भी गांवों में जाते हैं तब पुराने समय के लोगों की रात्रि 8 बजे से ही शुरू हो जाती है और वे इसी समय सांयकाल का भोजन करके रात्रि विश्राम के लिए चले जाते हैं। सुबह चार या पांच बजे हर स्थिति में वे बिस्तर छोड़ देते हैं। वे आज भी स्वस्थ्य और सक्रिय महसूस करते दिखाई देते हैं। इसे अधिक से अधिक अंगीकार किया जायेगा तो हम अपनी संस्कृति के विकास के साथ अपने स्वास्थ्य के साथ भी न्याय करेंगे।
संवाद इंडिया

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