‘सिंधिया’ पर हो गया राजनीतिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

भोपाल। जिस नेता को प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती थी वह आज लोकसभा का चुनाव हार गया। जिसकी मांग मुख्यमंत्री बने कमलनाथ से अधिक थी वह अपने ही बाल सखा से चुनाव हार गया। जिस नेता को राहुल गांधी का सिपहसलार माना जाता था और उन्हें यूपी जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी दी गई यूपी तो हारे ही अपनी सीट भी हार गये। जिस सिंधिया राजघराने के लिए ग्वालियर से अधिक सेफ सीट गुना मानी जाती थी वहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया का हारना प्रभात झा के पोरखण विस्फोट से कम नहीं है। साथ में यह राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक भी है। एक कांग्रेसी नेता ने सुबह ही बताया कि कमलनाथ वणिक नेता हैं ब्रबरीक की भांति एक तीर से पेड़ के सारे पत्ते भेद दिये। बेटे को हवा से निकाल लिया और आनन-फानन में घोषणा करवा ली और जितने भी नाम थे खब के सब खेत रह गये। इन सबमें हार सिंधिया की खलने वाली है। अविश्वसनीय है। कुछ तो मोदी का प्रकोप रहा और कुछ अपनों ने दगा दे दिया। समीक्षा इस बात की की जायेगी कि सिंधिया का महल मोदी की सनामी में डहा है या फिर धक्का देने में अपनों का भी हाथ है। समय है राजनीति से उभरने के बाद राजनीति होगी। कांग्रेस की राजनीति का मतलब ही यही होता है बदला तत्काल लिया जाता है।
गुना लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि यहां से महल ही जीतता रहा है। राजमाता सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया। जिस प्रकार से राहुल अमेठी से हार गये ठीक उसी प्रकार से सिंधिया गुना से हार गया। लेकिन राहुल को हराने की रणनीति तैयार हो गई थी। सिंधिया को लेकर कोई रणनीति नहीं थी। वे तो अपने यहां के सर्जिकल स्ट्राइक के शिकार हुये हैं। पहले मुख्यमंत्री बनने से वंचित रह गये अब संसद बनने से। सिंधिया कभी हार भी सकते हैं यह इतिहास में दर्ज हो गया। यह परिवार अपने गढ़ में हार जाये यह करिश्मा मोदी के कारण हुआ या यहां के नेताओं के कारण। हार ऐसी नहीं है जैसी नुकलनाथ की जीत है। सिंधिया एक लाख 35 हजार 549 वोटों से हारे हैं। केवल सिंधिया हारे हैं ऐसा नहीं है। सारे दिग्गज हार गये। समझा जा सकता है कि अजय सिंह राहुल मां के कारण हार गये। उनकी मां केवल मां नहीं थीं अर्जुन सिंह की धर्मपत्नी भी थीं। लेकिन अरूण यादव को सहारा क्यों नहीं मिला? दिग्विजय सिंह की घोषणा कागज जेब से निकाल कर की गई थी। वे अखिर नहीं चाहते थे कि भोपाल से लड़ें।
कांग्रेस के एक नेता ने सुबह ही बताया था कि हार जीत तो होती ही रहती है लेकिन हार जीत के साथ में राजनीति हो जाये तब अखरता है। अब राजनीति शुरू हो ही गई तो आगे कौन पीछे हटने वाला है। दिग्विजय सिंह ने समन्वय बनाकर कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन बदले में भोपाल से हार मिली। वो साध्वी के हाथों। जिसको लेकर कांग्रेस की  कहानी के एक पात्र बनने की स्थिति बनी थी। लेकिन सिंधिया को लेकर सर्जिकल स्ट्राइक हो गया। प्रभात को अध्यक्ष पद से हटाया गया तो उन्होंने कह दिया था कि पोखरण हो गया। उस समय सर्जिकल नाम चलन में नहीं था। विदेश से लौटने के बाद सिंधिया की प्रतिक्रिया क्या होगी इसकी प्रतीक्षा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button