‘सरकार’ लाख चाहे हम तो लगवाकर रहेंगे ‘लाकडाउन’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। कई बार लगता है कि सरकार और जनता के बीच में प्रतिस्पर्धा चल रही है। कोरोना को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा में सरकार को लग रहा है कि यदि लाकडाउन लग गया तो उसकी माली हालत बिगड़ जायेगी? लेकिन जनता है कि मानने को ही तैयार नहीं है वह तो लगी है कि हम नहीं सुधरेंगे चाहे लाकडाउन ही क्यों न लग जाये? अब खुद सरकार मास्क पहनाने निकल पड़ी है। सोशल डिसटेंशन के लिए गोले बनाये जा रहे हैं। इसके बाद भी न तो भीड़ कम हो रही है और न ही नियमों का पालन किया जा रहा है। सब अपनी-अपनी हेकड़ी में हैं। जुर्माना लगाकर पहले से कोरोना में आर्थिक तंगहाल जनता से वसूली की जाने लगी है। जेब की क्षमता हो न हो लेकिन पुलिस के साथ निगम को आय बढ़ाने का इससे सरल रास्ता कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए जुर्माना लगाने का सिलसिला चल निकला है। सच में क्या सरकार जो कह रही है वह सही है या जनता के बीच से जो आवाज आ रही है उसमें दम है। पांच राज्यों में भीड़ भरी सभाओं के बाद भी कोरोना नहीं फैल रहा है जबकि महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में इसका क्षेत्र विस्तार कर रहा है। क्या समझा जाये कि कोरोना भीड़ से डर रहा है? नहीं ऐसा नहीं है इतना सी बात है कि जिस पर बीती है वह जानता है और कुछ बीते इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

बात उन दिनों की है जब कोरोना को लेकर समझ नहीं थी। डाक्टर ईलाज नहीं जानते थे। सरकार बंदोबस्त नहीं कर पा रही थी। मरीज मरीज है या नहीं यह नहीं पता था तब हमने भुगता। वे दिन डरावने थे। इसलिए हम तो यह कह सकते हैं कि कोरोना से बचाव करने के लिए सरकार की गाइडलाइन को मानना चाहिए और शिद्दत से मानना चाहिए। जिन घरों में कोरोना हो चुका है उन घरों की हालात देखकर समझना चाहिए। दूसरी तरफ कुछ मेडिकल जानकार कह रहे हैं कि इन दिनों मौसम का बदलाव हो रहा है दिन में गर्मी भी और सर्दी भी। इसलिए जांच कराने पर कोरोना के सिम्टमस दिखेंगे ही। लेकिन यह कोरोना है या नहीं इसको लेकर विमर्श करना चाहिए। ऐसा हर वर्ष होता है। इन्हीं भ्रम में जनता है कि मानना ही नहीं चाहती है। इसलिए अब प्रशासन सरकार और खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैदान में उतर आये हैं। वे चाहते हैं कि जो महामारी लगभग चली सी गई थी वह वापसी क्यों करने लग गई है वह न कर पाये?

महाराष्ट्र की बात तो समझ में आती है जिस सरकार और पुलिस को कोरोना रोकना था वह वसूली टारगेट में लगी हुई है। लेकिन मध्यप्रदेश में इसके बढऩे का मतलब यह ही हुआ ना कि सरकार इसे रोकना चाहती है और जनता लाकडाउन लगवाने पर तुली है। हम कदम दर कदम इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। रात का काफ्र्यू, बाद में रविवार का लाकडाडन, अब इसका विस्तार। सच बात यदि कही जाये तो हमें ही सुधरना होगा। सरकार ने डाक्टरों की सलाह से जो मानक तय किये हैं उनका पालन करना होगा। अपने घरेलु डाक्टरों से राय ले सकते हैं। वे भी यही कहेंगे कि नियमों का पालन ही हमें सुरक्षित रख सकता है। यह बीमारी तेजी फैलती है यह तो एक बात है लेकिन वे दिन बहुत बुरे होते हैं जब आपके करीब करीबी भी नहीं आना चाहते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button