‘सरकार’ बनाने का मकसद केवल ‘भ्रष्टाचार’ है?

भोपाल (सुरेश शर्मा)। जब से देश में मोदी राज आया है तब से भ्रष्टाचार के मामले कम ही सामने आ रहे थे। यह भी हो सकता है कि जिनको यह सब मामले सामने लाना होते हैं वे उतनी रूचि नहीं ले रहे हों? यह भी हो सकता है कि वे खुद की रूचि को दबा कर बैठना बेहतर समझ रहे हों। लेकिन जिस प्रकार से महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही है उसके बाद तो यह कहने और लिखने का मन करता है कि क्या ये सरकारें केवल भ्रष्टाचार करने के लिए ही बनती हैं? यदि शरद पवार की पार्टी राकांपा की ओर से महाराष्ट्र का गृहमंत्री मुम्बई भर से 100 करोड़ रुपये महीना उघाने का आदेश देता है तब तो इस भयावह स्थिति की कल्पना कर सकते हैं। आरोप विपक्ष का नहीं है। आरोप पुलिस विभाग के प्रभावशाली अधिकारी का है। उसने सीएम का पत्र लिख और देश की न्यायव्यवस्था के सामने भी खड़ा हो गया। अब नया खुलाशा इस बात को तो प्रमाणित करता ही है कि परमबीर सिंह का पत्र तथ्यों पर आधारित है आरोपों का दायरा भी बढ़ा देता है। प्रमाणिकता यह कि गृहमंत्री 100 करोड़ की उघाही करने की कहता ही था परिवहन मंत्री भी रकम लाकर देने की बात करता है। शरद पवार भी आरोपों के दायरे में लिपट रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के पत्र बम अभी भी जारी हैं। सचिन वाझे ने भी पत्र बम फोड़ दिया है। यह बम बता रहा है कि जो गृहमंत्री 100 करोड़ वसूलने की बात कह रहा था वह तो पैसे का बड़ा भूखा है। वाझे को निलंबित करने का आदेश शरद पवार का था उसके बाद भी 2 करोड़ देने पर बहाल करने की मंशा जता दी गई। इससे यह सिद्ध करने में अधिक कठिनाई नहीं होगी कि शरद पवार जिसे निलंबित करने की कहे और देशमुख 2 करोड़ की डील कर ले तो पवार से कितना याराना होगा? यह याराना लेनदेन का तो कम से कम है ही। परमबीर की बात को वाझे भी प्रमाणित कर रहे हैं। अब तो वसूली में शिवसेना के परिवहन मंत्री भी शामिल हो चले हैं। ये परिवहन विभाग का मंत्री होने का मतलब ही यही है कि हाथ चिकने तो हर हाल में होते रहेंगे चाहे सीएम सीधे सब क्यों न समझ लें? अब तो राकांपा और शिवसेना इस भ्रष्टाचार के महासमर में एक साथ नंगे दिखाई दे रहे हैं। महाविकास अघाड़ी की साथी कांग्रेस अभी भूखी दिखाई दे रही है। हो सकता है कि उसे भी झूठन मिल रही हो। समय का इंतजार करते हैं आने वाले समय में कोई खुलाशा हो जाये।

सवाल यह उठता है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने मिलकर सरकार किस कारण बनाई थी? सरकार बनाने का मकसद अब राज्यपाल का पूछना चाहिए यह समय आ गया है। मोदी सरकार के मामले अभी सामने नहीं आये हैं लेकिन राज्यों में ऐसे गुल खिलते देखे जा सकते हैं। देेश में विपक्ष की सरकारें कम हैं लेकिन जहां हैं वहां ऐसे कारनामों की चर्चा होती ही है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार के समय  की बात स्वयं मुख्यमंत्री ने कही थी। मंत्रालय दलालों का अड्डा बन गया था। नाथ सरकार के समय खुली मांग थी। चुनाव की लागत वसूलने का आरोप था। बात आयकर विभाग के पत्रों तक पहुंच गई। सबसे चिंता की बात यह है कि परिणाम ढ़ाक के तीन पात ही क्यों होता है?

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