सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच सिर्फ नाम की ही

जबलपुर। सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क जांच योजनाओं के तहत की जाने वाली अधिकांश जांच केवल बोर्ड पर ही दिख रही हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लेकर विक्टोरिया जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल रांझी में निर्धारित नि:शुल्क पैथोलॉजी व अन्य जांच नहीं की जा रही हैं। जिले में 14 के लगभग शहरी व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां भी बारह तरह की नि:शुल्क जांच उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। लेकि, यहां जांच नहीं की जा रहीं। जिले में केवल एल्गिन हॉस्पिटल में ही सभी उपलब्ध 32 तरह की जांच हो रही हैं।
कायाकल्प पुरस्कार योजना में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विक्टोरिया अस्पताल में मरीजों को सुविधाओं के अभाव में परेशानी हो रही है। जांच किट नहीं होने से पैथोलॉजी में 52 में से मात्र 32 प्रकार की ही जांच हो रही है। खून-पेशाब से सम्बंधित जांचोंं के लिए मरीजों को मेडिकल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। संक्रमण का पता लगाने की जांच दोपहर एक बजे तक ही हो रही है। इसके बाद पहुंचने वाले मरीजों को दूसरे दिन आने के लिए कहा जा रहा है। स्त्री रोग से सम्बंधित जांच के लिए मरीजों को एल्गिन अस्पताल भेजा जा रहा है। सर्जरी के पहले के कई ऐसी जांच है जो नहीं हो रही है। जिसके लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी से जांच करानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में कल्चर टेस्ट, हड्डी के रोग से सम्बंधित आरए फैक्टर टेस्ट, पेट से सम्बंधित सिरम इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट,बॉडी में इन्फेक्शन के लिए पीआरपी और हार्ट की जांच के लिए पीपीकेएमबी टेस्ट, पैप स्मेअर और टार्च टेस्ट, सर्जरी से पहले ब्लड टेस्ट पीटी, पीटीटी,मिनेंजाइटिस के लिए पीएसएफ टेस्ट नहीं हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में निर्धारित जांचों की संख्या कम है। यहां 63 तरह की नि:शुल्क जांच का उल्लेख है। लेकिन, कुल 50 से 52 जांच ही हो रही है। उसमें भी कई मौके ऐसे आते हैं जब किट नहीं होने का हवाला देकर जांच टाल दी जाती है। जिले में शहरी व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 14 हैं। इनमें से प्रत्येक केंद्र में 12 तरह की जांच नि:शुल्क करने के निर्देश हैं। इनमें हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरिन शुगर एल्बुमिन, मलेरिया सहित कई ऐसी बेसिक जांच उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। अभी यहां पर जांच के लिए टेक्नीशियन की नियुक्तिकी गई है। उपकरण भी खरीदे गए हैं, लेकिन जांच नहीं हो रही है।

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