‘समझ’ आया क्यों हो रहा है ईडी का ‘विरोध’?

भोपाल। एक सवाल आमतौर पर पूछा जाता है कि मोदी सरकार ने कालेधन को लेकर क्या किया? दूसरा आरोप यह लगता है कि ईडी का राजनीतिक दुरूपयोग किया जा रहा है। पिछले दिनों इत्र व्यापारी के यहां छापा मारा गया था उसके यहां से करोड़ों रुपये मिले थे। जिसका वह हिसाब नहीं दे पाया था। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि मोदी ईडी का दुरूपयोग कर रहे हैं। दुरूपयोग तो तब होता जब छापा पड़ता और कुछ भी नहीं निकलता? केजरीवाल के मंत्री सत्येन्द्र जैन अब तो जेल की हवा खा रहे हैं। यदि मोदी ने ईडी का दुरूपयोग किया होता तो न्यायालय जेल भेजने का आदेश क्यों देते? सबूत देते और छूट जाते। सबूत नहीं थे तो न्यायालय में कह देते कि मोदी ने राजनीतिक बदला लेने के लिए ईडी का उपयोग किया है इसलिए उन्हें छोड़ दो। लेकिन ऐसा भी तो नहीं कहा। उल्टे याददास्त गायब हो गई। दूसरों को ईमानदारी का प्रमाण-पत्र बांटने वाले केजरीवाल की सफेद चादर के नीचे की काली कंबली दिखाई देने लग गई। पूरे दिन आबकारी नीति पर मोदी पर गोले दागते रहे लेकिन एक बार भी नहीं बोला कि आबकारी नीति में लगे आरोप इस कारण से गलत हैं। ईडी अब बुरा तो लगेगा ही। काले चोरों से काला धन निकालने का काम जो हो रहा है। अब ममता का राग देखिये। पता चला क्यों हो रहा है ईडी का विरोध।
एक बात और याद आ गई। शिक्षकों के घोटाले में हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे श्रीमान ओमप्रकाश चौटाला सालों जेल में बिता कर आये हैं। अब ऐसा ही मामला ममता राज में दिखाई दिया है। एक छोटी सी बीस करोड़ की नकदी पकड़ी गई है। इन काले गौरख धंधे करने वालों के पास 20 करोड़ कोई बड़ी रकम थोड़े ही होती होगी। हम सामान्य व्यक्ति ही है जिनको पेट्रोल के बढ़े दाम और अब खानपान पर लगाया गया जीएसटी भी अखरता है। अखरेगा ही, क्योंकि जो खाने पर टैक्स लगाये उसकी तारीफ भी तो नहीं की जा सकती है। फिर भी कालेधन को लेकर चल रही मोदी की मुहिम का डोल तो पीटा ही जायेगा। साथ में यह भी बताया जायेगा कि जिनको कालेधन का हिसाब चाहिए वे सब कालेधन के आरोपियों की कतार में खड़े हैं। खूब शोर करती थीं ममता बनर्जी। अब अपने मंत्री के कारनामें के सामने आने पर मोदी सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप चस्पा करने के अलावा और क्या कह सकती हैं? लेकिन क्या करो यह मोदी है जो मानने को ही तैयार नहीं है।
स्वीस बैंक की बात छोडिय़े भारत में ही इतना बड़ा कालेधन का अड्डा बना हुआ है। इस पर प्रहार करने स्वीस बैंक के पास पैसा जमा कराने कौन जायेगा? लेकिन एक बात साफ हो गई? ईडी की मुखालफत करने वाले वे ही सबसे आगे हैं जिनके घर में या समर्थकों के यहां कालेधन की तिजोडिय़ां लबालब हैं। ममता का शोर थम गया क्योंकि शोर के लिए भी नैतिकता चाहिए। नैतिकता की पोल खुल गई है। उपराष्ट्रपति के चुनाव से किनारा कर लिया इसके बाद भी ईडी ने कमाल दिखा दिया। कोई भी देशभक्त नागरिक यही कहेगा कि कुछ गति और बढ़ाईये ईडी साहब ममता व सोनिया से आगे भी
बहुत कुछ हैं।

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