‘शुभेन्दु’ नेता प्रतिपक्ष इसे कहते हैं दाद में ‘खाज’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। नंदीग्राम की जीत के महानायक शुभेन्दु अधिकारी को भाजपा ने बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया है। वे अनुभवी राजनेता के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विधानसभा आम चुनाव में नंदीग्राम से पराजित करने वाले योद्धा भी हैं। भाजपा ने पांच साल के लिए ममता को ऐसी खुजली दी है जिसे वे खुजा भी नहीं सकती और दिखा भी नहीं सकती। जब भी मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी पर बैठेंगी तभी उन्हें विपक्ष के नेता की कुर्सी वह व्यक्ति बैठा दिखाई देगा जिसने उन्हें चुनाव हराया है। यह टीस उन्हें सदन में हर समय दिखाई देगी। जब भी मुख्यमंत्री किसी बात का दंभ भरेगी एक वाक्य ही उसकी काट करेगा कि आप तो अपनी परम्परागत सीट भवानीपुर छोड़कर आये थे मुझे हराने के लिए लेकिन नंदीग्राम ने आपकी नहीं सुनी और आपको अजेय नहीं रहने दिया। आप हार के बाद पार्टी सुप्रीमों हैं इसलिए आपको ही मुख्यमंत्री चुना गया। इन शब्दों के बाद राजनीति की शर्मींदगी तो जरूर आयेगी फिर चाहे कोई उसका प्रदर्शन करे या न करे। अब माना जायेगा कि भाजपा रणनीति करने में दो कदम आगे है। उसने ममता को आने वाले पांच साल के लिए ऐसी स्थिति में खड़ा कर दिया है कि वह न तो निगल सकती हैं और न ही उगल सकती हैं।

यह तो रही एक बात। दूसरी बात यह है कि शुभेन्दु अधिकारी ने नेता प्रतिपक्ष बनते ही विधायकों को धन्यवाद दिया और ऐलान कर दिया कि वे राज्य में चल रही हिंसा को समाप्त करने के लिए न केवल आवाज उठाऊंगा बल्कि उसे समाप्त करने के लिए संघर्ष भी करूंगा। यह ममता की सबसे बड़ी ताकत है। वामपंथी हिंसा की राजनीति करके ही सत्ता को बचाये रखने की कला में पारंगत थे। ममता बनर्जी ने भी उसी हिंसा का प्रत्युत्तर दिया और सत्ता प्राप्त कर ली। उन्होंने उसे बचाये रखने के लिए उसी फार्मूले का उपयोग किया। भाजपा ने छलांग तो खूब लगाई लेकिन सत्ता इसलिए हासिल नहीं कर पाई कि उसने ममता की हिंसा वाली राजनीति का हिंसा से जवाब नहीं दिया। इससे जनता ने सुरक्षा की गांरटी नहीं माना और भाजपा के साथ खुलकर नहीं खड़ा हो पाई। अब चुनाव बाद की हिंसा का जवाब जिस रणनीति से भाजपा दे रही है उससे जनता का समर्थन देर-सवेर मिल ही जायेगा। ऐसे में शुभेन्दु अधिकारी का नेता प्रतिपक्ष बनना उसके साथ ही केबिनेट मंत्री का दर्जा पाना, अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बने रहना ही महत्वपूर्ण हो जायेगा। साथ में हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की बात करना ममता के लिए भारी पड़ जायेगा।

भाजपा इन दिनों रणनीति के मामले में अन्य राजनीतिक दलों से खासी आगे है। बंगाल चुनाव के परिणाम से पीके खुश हैं लेकिन वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि सदन में न कांग्रेस है न वामदल, पूरा मैदान भाजपा के पास है। मुख्यमंत्री चुनाव हारी हुई नेता हैं। उनको पराजित करने वाला सामने वाली कुर्सी पर विराजमान है और सत्ता पाने का हथियार हिंसा अब निशाने पर में है। ऐसे में भाजपा ने पाया खूब और खोया कुछ नहीं है। भाजपा की चुनावी रणनीति भी सफल रही और अब नेता प्रतिपक्ष शुभेन्दु अधिकारी को बनाकर ममता के दाद में खाज डाल दी जिसे वे न खुजा सकतीं हैं न दिखा सकतीं।

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