शिवराज सिंह चौहान : चार शपथ पन्द्रह साल पूरे

भोपाल (विशेष प्रतिनिधि)। मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में कोई भी मुख्यमंत्री दो बार के कार्यकाल से अधिक सत्ता में नहीं रहा। शिवराज सिंह चौहान ने इस मिथक को तोड़ते हुए पन्द्रह साल तक मुख्मंत्री रहने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया। वे दस दिन ऊपर जाने के बाद भी लोकप्रियता में किसी अन्य नेता से कोसो दूर हैं। इसका कारण यह है कि वे सरल, सहज और मिलनसार नेता हैं। वे गरीब के दुख को समझते हुए उसे दूर करने की मंशा रखते हैं। सरकार को जनमानस की सरकार और मुख्यमंत्री निवास को सामंती स्वरूप से बाहर निकालने का उपक्रम रख चुके हैं। वे धार्मिक भी हैं और सर्वधर्म समभाव को भी अंगीकार करते हैं। वे संघ के भरोसामंद भी हैं लेकिन अटल जी की तरह सभी में स्वीकार्य भी। वे जनता में अपने से लगते हैं लेकिन निर्णय लेकर क्रियान्वित करने वाले नेता भी। इन्हीं कारणों से वे इतने दिनों सत्ता में रहने के बाद भी किसी बड़े विरोध के शिकार नहीं हुए हैं।

जब हम यह समाचार लिख रहे हैं उस समय शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पन्द्रह साल ग्यारह दिन कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अभी उनको प्रदेश की सरकार संचालन की जिम्मेदारी और निभाना है। अगले विधानसभा के चुनाव तक उनके बदलाव की राजनीतिक संभावना दिखाई नहीं दे रही है। इसका कारण यह है कि उनकी लोकप्रियता को कोई चुनौती नहीं ठहर पाती है। केन्द्रीय नेतृत्व में पक्ष विपक्ष से अधिक ताकतवर है इसलिए उनको खतरा होगा ऐसा दिखाई दे नहीं रहा है। इसके मुख्य कारणों में शिवराज सिंह चौहान का काम करने का तरीका इतना पारदर्शी और सर्व स्वीकार्य रहता है कि उनको चुनौती देने की विपक्ष भी नहीं सोचता है अन्दरखाने की एकजुट ताकत है ही नहीं।

शिवराज सिंह चौहान जब पांव-पांव वाले भैया के रूप में ख्याति पाकर राजधानी भोपाल राजनीति करने के लिए आये थे तब किसी को यह संभावना नहीं लग रही थी कि शिवराज इतनी संभावनाओं वाले नेता हैं। लेकिन वे कदम दर कदम प्रभावशाली और लोकप्रिय होते चले गये। उनके वहले दौर के भाषण में गांव की पीड़ा दिखाई देती थी। वे कहते थे कि गांव का लुहार और मोची क्या करेगा जब टाटा लुहार का और बाटा मोची का काम करने लग जायेंगे? यह टीस लेकर वे राजधानी आये थे। महिलाओं की बदहाली और परेशानी को उन्होंने रूबरू होकर समझा था। इसलिए सरकार में आने के बाद उनकी योजनाओं में किसान, महिला, गरीब, शिक्षा और विकास की ग्रामीण प्राथमिकता दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री का निवास सांमत का प्रतीक होता था। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की पंचायत करके उन्होंने उसे आम जनता के लिए खोला और आम लोगों को उनकी समस्याओं और समाधान को लेकर बात की। योजनाएं बनाई और उनका क्रियान्वयन किया। शिवराज इसी के बाद आम व्यक्ति की पंसद और उसके नेता हो गये। एक बार जो सिलसिला शुरू हुआ उसे बनाये रखने का हर दिन प्रयास होता है। किसी भी प्रसंग से उनका वास्ता जुडऩा और दर्द का बांटने की उनकी क्षमता का कोई भी कायल है। इंदौर में एक बस दुर्घटना के बाद पीडि़त परिवार से मिलना औरवहां महिला की बात सुनकर कोई भी गुस्से में आ सकता था लेकिन वहां का संदेश ही उन्हें शिवराज बनाता है। यही कारण है कि सरकार पर गंभीर आरोपों के बाद भी जनता में यह विश्वास नहीं होता कि शिवराज ऐसा कर सकते हैं। पन्द्रह साल के बाद भी शिवराज सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

भाजपा में कई प्रभावशाली नेता है लेकिन विरोध के बजाए समन्वय की राजनीति ही करते हैं। विपक्ष में कमलनाथ आये तब उनका खुला विरोध शुरू हुआ था लेकिन जब उनकी सरकार गिराई गई तब शपथ ग्रहण के बाद पहले दिन ही बेटे के साथ नये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुलदस्ता देने चले आये। यह राजनीति का बिरला उदाहरण है। पक्ष या विपक्ष बोतल में हैं।

महत्वपूर्ण यह है कि कोई भी नेता निरन्तर जनता से जुड़ा रहे और जनता की बातों से आइडिया निकाल कर उससे विकास की राह तलाश ले। शिवराज सिंह चौहान ऐसे नेता हैं जिन्होंने सबमें विश्वास बनाया है। सब उन्हें अपना मानते हैं। सभी समाज के लोग मिलकर शिवराज में विश्वास करते हैं यही उनकी पूंजी है। यही उनके पन्द्रह साल के राज का मूल मंत्र है।

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