वॉलमार्ट ने खरीदी फ्लिपकार्ट, अब फोनपे की किस्मत रही चमक

नई दिल्ली। कहते हैं जब भाग्य बदलने वाला होता हैं तो किसी भी तरह से बदल जाता है। सबसे बड़ी देशी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को जब दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल चेन कंपनी वॉलमार्ट ने खरीदा तब उस यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा की उसके साथ में मिली डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे इतनी तरक्की करने वाली है। अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट के साथ डील के वक्त उसकी सहायक कंपनी फोनपे को लेकर बहुत कुछ सोचा नहीं था। लेकिन,अब फोनपे भारत की टॉप स्टार्टअप के रूप में उभर रही है।
फ्लिपकार्ट बोर्ड ने हाल ही में फोनपे प्राइवेट लिमिटेड को खुद को नई इकाई के रूप में स्थापित करते हुए बाहरी निवेशकों से 1 अरब डॉलर (करीब 65 अरब रुपये) जुटाने की अनुमति दे दी। सूत्रों के हवाले से खबर दी कि फ्लिपकार्ट बोर्ड ने फोनपे का वैल्युएशन 10 अरब डॉलर (करीब 650 अरब) निर्धारित किया है। खबर के मुताबिक, अगले कुछ महीनों में फंडिंग जुटाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। तब फोनपे एक स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करने लगेगी। हालांकि, वॉलमार्ट की मालिकाना हक वाली कंपनी फ्लिपकार्ट की उसमें बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी। गौरतलब है कि फोनपे से होने वाला ट्रांजैक्शन पिछले कुछ वर्षों में चार गुना हो गया है। कंपनी अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनी पेटीएम पर कड़ी टक्कर दे रही है। पेटीएम को दिग्गज निवेशक वॉरन बफेट का समर्थन हासिल है।
फ्लिपकार्ट को छोड़ने वाले तीन दोस्तों ने फोनपे की स्थापना दिसंबर 2015 में की थी। फ्लिपकार्ट के संस्थापकों बिन्नी और सचिन बंसल ने एक साल के अंदर ही इस यह सोचकर खरीदने का फैसला किया कि इससे फ्लिपकार्ट के ग्राहकों को पेमेंट की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। इसके बाद 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी कर दी। कैश का अचानक अभाव होने के कारण बड़े पैमाने पर लोगों न डिजिटल ट्रांजैक्शन का रुख किया जो फोनपे के लिए वरदान साबित हुआ। उधर,रिलायंस जियो ने भी उसी समय सस्ता डेटा देना शुरू किया। जिसके बाद स्मार्टफोन की मांग बढ़ी और विभिन्न चीनी स्मार्टफोन कंपनियों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी। जिससे स्मार्टफोन की कीमतें भी नीचे आ गईं। फोनपे को इंटरनेट और स्मार्टफोन के सस्ते होने का भरपूर फायदा मिला। अब अनुमान जताया जा रहा है कि फ्लिपकार्ट से अलग होकर स्वतंत्र इकाई बनने के बाद फोनपे का वैल्युएशन 14 से 15 अरब डॉलर (करीब 910 से975 अरब) तक हो जाएगा।

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