‘वैक्सीन’ आएगी मुफ्त मिलेगी देखिए क्या ‘सीन’ है?

सुरेश शर्मा

भोपाल। जब आप चुनाव में वादे करते हैं तब यह समझ में आ जाता है कि देश में क्या सीन बनने वाला है? इस समय कोरोना महामारी का समय है। चुनाव में जनता से अधिकाधिक संपर्क में आना कठिन है। लेकिन जब कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर दी जाती है तब जनता के साथ उनका जुड़ाव हो जाता है। मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव हुऐ थे तब किसान को कर्जमाफी का ऐलान से जोड़ा गया था। शिवराज सरकार मामूली अन्तर से पराजित हो गई थी। यह अलग बात है कि कमलनाथ सरकार कर्जमाफी नहीं कर पाई और सरकार को गिरना ही था सो गिर गई। अब कोरोना वैक्सीन का नारा गूंज रहा है। बिहार चुनाव के वक्त भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया है कि बिहार की जनता को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में दी जायेगी। इसका विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह देश के अन्य राज्यों के साथ पक्षपात है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो केन्द्र सरकार की योजनाओं, घोषणाओं और मंशा के अनुरूप काम करते हैं तत्काल इस घोषणा को लपका और कह दिया कि मध्यप्रदेश में भी गरीबों को मुफ्त वैक्सीन दी जायेगी की घोषणा कर दी। इससे यह संदेश चला गया कि केन्द्र सरकार ने कोरोना का मुफ्त ईलाज कराया है तो वह पहली बार वैक्सीन भी मुफ्त में ही देगी।

विपक्षी दलों ने मोदी के काम करने के तरीकों की आलोचना करने के लिए एक नया रास्ता ईजाद किया है। कमियां तो निकाली नहीं जा सकती हैं इसलिए उसके प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाये। सेना ने पाक में घुसकर आतंकवादियों को मारा और उनके ठिकानों को ध्वस्त किया तब सबूत मांगे गये। सेना पर सबको भरोसा है। विपक्ष को भी होगा। लेकिन श्रेय मोदी सरकार को न मिले इसलिए इतने सवाल उठाये गये कि लोग भ्रम में पड़ जायें। कृषि बिल आये। किसान के हित के इन बिलों को भी विपक्षी दल शंका में डालने के लिए आन्दोलन करवा रहे हैं। यदि वैक्सीन को लेकर इस प्रकार का भ्रम पैदा किया जा रहा है तब इसका मतलब ही यही है कि विपक्ष मोदी के काम करने और निर्णय लेने की क्षमता की बराबरी नहीं कर सकता है। वह उस विषय को भ्रम के हवाले कर देता है। मोदी ने आज की गया की सभा में यही कहा भी है। विपक्षी दल हमारे काम के प्रति भ्रम की स्थिति पैदा करता है। उसके भ्रम को तोडऩा है। वैक्सीन को लेकर फैलाये गये भ्रम का भी कोई असर न हो इसके लिए भाजपा और जदयू प्रयास कर रहे हैं।

वैक्सीन मुफ्त मिल जायेगी तो गैर राजग पार्टियों को पसीना क्यों आ रहा है? गरीब व्यक्ति यदि स्वस्थ्य रह जायेगा तो विपक्षी दलों को परेशानी क्यों है? आम जनता का पैसा है। उसी पर खर्च किया जा रहा है तब परेशानी किस बात की है? लेकिन भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जाना राजनीति का हिस्सा बन गया है। राजनीति का क्या सीन है जो बिहार में सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं उनको बिहार की जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करने वाली योजना से इतना भय क्यों लगता है? चुनाव घोषणा पत्र के मायने भी यही थे कि जनता को सरकार में आने के बाद देंगे क्या? यह लालच तो स्वास्थ्य के सुधार की रक्षा करने वाली है फिर क्या हर्ज है?

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