वसूली के आरोपों में फंसी उद्धव सरकार

मुम्बई। महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी रखने के मामले में चौंकाने वाले तथ्य एनआईए खोज ही रही है और  नये खुलाशे हो ही रहे हैं। अब तो पूर्व पुलिस आयुक्त मुम्बई परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखकर ऐसा धमका कर दिया है जिससे सरकार की चूलें हिल गई हैं। सरकार का संचालन कर रही महा अघाड़ी के तीनों दलों शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के सामने विश्वास का संकट आ गया है। सवाल यह उठने लगा है कि सबका सरकार बनाने का मकसद क्या था? परमबीर सिंह ने अपने पत्र में खुलकर लिखा है कि गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को अपने घर बुलाकर 100 करोड़ की वसूली करने के लिए आदेश दिया। गृहमंत्री ने खुद की उसका तरीका भी समझाया। इसी प्रकार वे अधिकारियों को सीधे अपने घर बुलाने लग गये थे और इसी प्रकार से वसूली के लिए अलग-अलग टारगेट देते रहते थे। इस प्रकार के पत्र के बाद राजनीति में उबाल आ गया और सरकार बचाने के लिए उद्धव ठाकरे बैठकों को दौर चला रहे हैं। विपक्षी दल भाजपा के नेताओं ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठाना शुरू कर दी है। आने वाले दिन और गहमा-गहमी वाले होने वाले हैं।

> गृहमंत्री पर पूर्व मुम्बई पुलिस आयुक्त ने लगाया 100 करोड़ का टारगेट देने का आरोप
> मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखा पत्र दी विस्तार से जानकारी
> गृहमंत्री अनिल देशमुख ने किया पलटवार सीपी जांच को प्रभावित करने लिख रहे हैं पत्र, लगा रहे हैं आरोप
> उद्धव सरकार पर विश्वास का संकट चल रहा है बैठकों को दौर सब तय करेंगे शरद पवार।

बीते दिन मुम्बई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमजीत सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक खुला खत लिख दिया। खत में गृहमंत्री की खता को उजाकर करके ऐसी चोट की है कि आज तक किसी भी पुलिस अधिकारी ने अपनी ही सरकार पर नहीं की होगी। परमबीर ने गृहमंत्री पर वसूली करवाने का आरोप तो लगाया ही उसके प्रमाण भी पेश कर दिये। अब गृहमंत्री इसे जांच को प्रभावित करने के तरीके बता कर बचने का प्रयायस कर रहे हैं। महाराष्ट्र में विरोधी दल भाजपा और राज ठाकरे ने भी गृहमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान तो ला ही रहा है लेकिन शिवसेना की सरकार बनाने की मंशा और सहयोगियों के द्वारा कितनी कीमत वसूल करना है इसकी जानकारी भी पेश कर रहा है।

बीती रात में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पत्र के मामले में सभी सहयोगी दलों की एक आपात बैठक बुलाई और विषय की गंभीरता को देखते हुए शरद पवार से बात करने का निर्णय हुआ। अब शरद पवार इस मामले में निर्णय लेंगे। वे गृहमंत्री को हटाने का निर्णय लेकर मामले को शान्त करने का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन इस मामले में गंभीर अपराध छुपा हुआ है और वसूली के साथ देश के सबसे बड़े उद्योगपति के घर के सामने विस्फोटक रखने का मामला भी शामिल है इसलिए इसमें कोई भी ढ़ील की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। यह विषय आने वाले दिनों में और अधिक ताकत के साथ आयेगा। यह भी माना जा रहा है कि इससे उद्धव सरकार किस प्रकार से बचेगी या फिर इसकी आंधी में वह धराशाही हो जायेगी। ये आरोप गंभीर और देश की चिन्ता बढ़ाने वाले हैं।

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