लंबी लकीर पर चलने की जिम्मेदारी संभालेंगे महंत रामप्रवेश दास

भोपाल ( विशेष प्रतिनिधि )। कुछ दिन की कवायद और राजी नाराजगी के बीच गुफा मंदिर के चौथे महंत के रूप में महंत रामप्रवेश दास महाराज को सर्व अनुमति से महंत चुन लिया गया है। महंताई की जिम्मेदारी विजय दास महाराज संभालेंगे। रामप्रवेश दास जी महाराज  चौथे महंत के रूप में गुफा मंदिर की गादी को संभालेंगे। पहले के तीन महंत भोपाल में हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व भी करते रहे हैं। इसकी एक लंबी लाइन खींची हुई है। महंत रामप्रवेश दास जी को इस लंबी लाइन के अंतिम छोर से अपनी यात्रा को प्रारंभ करना होगा। वे हिंदू समाज की प्रतिष्ठा के अनुकूल इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाएंगे ऐसी समस्त हिंदू जनों की अपेक्षा भी है और विश्वास भी।

गुफा मंदिर के पहले महंत नारायण दास जी महाराज ने भोपाल के सांस्कृतिक समागम को उस समय के दौर में न केवल जीवित रखा बल्कि उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह दौर भोपाल की नवाबी रियासत के बाद की मानसिकता का था। यहां हिंदू नेता और मुस्लिम नेताओं की मानसिकता भी कार्य करती थी। उनके बाद नरहरी दास महाराज ने भोपाल की गंगा जमुनी तहजीब को न केवल अंगीकार किया बल्कि हिंदू समाज के पक्ष को सुंदरता के साथ रखते हुए संस्कृति को और ताकत प्रदान की। महंत नरहरी दास महाराज के समय भोपाल में अनेकों बार ऐसे तनाव के अवसर खाए लेकिन महाराज जी ने उन्हें सहजता से हल करने में महती भूमिका निभाई।

जब यह जिम्मेदारी है उनके शिष्य और तीसरे महंत चंद्रमा दास त्यागी को प्राप्त हुई तब उन्होंने संस्कृत विद्यालय का उन्नयन, समाज में अत्यधिक स्वीकार्यता और हिंदू समाज के प्रतिनिधित्व करते हुए अन्य समाजों और सरकार के समक्ष सार्थक तरीके से बात रखकर गुफा मंदिर की महंत परंपरा का बड़ा विस्तार किया। उनका हंसमुख स्वभाव समाज में उनके प्रति आस्था का महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। इसी लाइन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब महंत रामप्रवेश दास जी को मिली है। जो धर्म परंपरा के प्रतिष्ठित संवाहक है। वे समाज के गुणों को विस्तारित और अंगीकार कराने में सिद्धहस्त हैं। रामप्रवेश दास महाराज का भोपाल के हिंदू समाज को मार्गदर्शन और सही दिशा मिलेगी यह उम्मीद सभी पक्षों में जागृत है।

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