राजधानी में मौसम की मार बढ़े उल्टी-दस्त के मरीज

भोपाल। शहर के अस्पतालों में उल्टी-दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजधानी में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया है। इसका सेहत पर भी बहुत ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। जेपी अस्पताल की ओपीडी में कल इमरजेंसी में सुबह 8 से 12 बजे के बीच उल्टी-दस्त के चलते छह मरीजों को भर्ती करना पड़ा। ओपीडी में भी करीब 40 फीसदी मौसमी बीमारी वाले मरीज आ रहे हैं।
जेपी अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल आलोक अग्रवाल ने बताया कि दो दिन में सुबह 8 से 2 बजे के बीच 13 मरीजों को भर्ती किया गया है। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। सभी को उल्टी-दस्त, बुखार, पेट में दर्द व जलन की तकलीफ के चलते भर्ती कराया है। भर्ती मरीजों के अलावा बुधवार व गुरुवार को इमरजेंसी ओपीडी में इलाज किया गया। वहीं, सामान्य ओपीडी में भी मौसमी बीमारियों से पीडि़त मरीज पहुंच रहे हैं। गुरुवार को मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 340 मरीज पहुंचे। इनमें करीब 150 मरीज गर्मी व धूप के चलते होने वाली बीमारियों के थे। हमीदिया अस्पताल में भी यही स्थिति है। कुल मरीजों में करीब 25 फीसदी, उल्टी-दस्त बुखार व पेट दर्द के आ रहे हैं। अस्पताल के आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. यश सराफ ने बताया कि इमरजेंसी में रोजाना 60 से 70 मरीज मौसमी बीमारी के आ रहे हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिसिन व शिशु रोग में करीब 40 फीसदी मरीज गर्मी व लू के आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के चलते मरीजों की सख्या अन्य दिनों के मुकाबले कम है। जेपी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के चलते आंखों में एलर्जी के मरीज बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि एलर्जी और गर्मी में आंखों का पानी सूखने की वजह से आंखें लाल हो जाती है, आंखों में खुजली और सूजन की शिकायत भी आ रही है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में 30 फीसदी मरीज इसी तरह की शिकायत वाले हैं। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि तकलीफ होने पर आंखों को पीने के ठंडे पानी से धोएं। अपने मन से आंख में दवा न डालें, बल्कि डॉक्टर को दिखाएं। हमीदिया अस्पताल में शिशु रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश टिक्कस ने बताया कि बच्चों में उल्टी-दस्त, हीट स्ट्रोक के साथ ही पीलिया टाइफाइड के केस भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों बच्चों की बीमारियों की दो वजह है तेज गर्मी के चलते शरीर में पानी की कमी और साफ पानी नहीं मिलना। उन्होंने कहा कि बहुत जरूरी न हो तो सुबह 11 से शाम 5 बजे तक बच्चों को लेकर बाहर न निकलें। जरूरी हो तो कुछ खिलाकर और पर्याप्त पानी पिलाकर निकलें। दस्त के दौरान बच्चों को शुरू से ही ओआरएस पिलाएं। इसका बड़ा पैकेट एक लीटर पानी में घोल कर थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें। 12 घंटे तक यह खराब नहीं होता। बीमारी के दौरान हल्का खाना जैसे खिचड़ी, दलिया व नारियल पानी आदि दें। बाहर की कटी-फटी चीजें न खिलाएं। तेज धूप से बचने के लिए सूती कपड़े पहनें, शरीर को पूरी तरह से कवर रखें, आंखों में चश्मा लगाएं।बाहर रखा हुआ या बांसा खाना न खाएं, साफ पानी पीएं। एसी से अचानक धूप में न निकलें। गले में दिक्कत है तो ज्यादा ठंडा पानी न पीएं। पानी वाली चीजें तरबूज, खरबूज, संतरे खाएं और नीबू पानी पीएं।

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