राजधानी में अगले 48 घंटे में पहुंचेगा मानूसन

भोपाल। आखिरकार सोमवार को मानूसन ने प्रदेश में आमद दे दी है। कल प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम विभाग की माने तो अगले 48 घंटे बाद भोपाल में इसका असर दिखाई देना शुरू हो जाएगा। प्रदेश के जिले मंडला, छिंदवाड़ा के रास्ते मानसून प्रदेश में पहुंच गया है। खंडवा में भी पिछले तीन दिनों में अच्छी बारिश की शुरुआत हो गई है। तीन दिन लगातार बारिश के बाद मौसम विभाग ने मप्र में मानसून की आमदगी की घोषणा कर दी। सोमवार शाम इंदौर में तेज बारिश हुई। कुछ इलाकों में इससे घरों में पानी भी घुस गया अगले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। मौसम वैज्ञानिक पीके शाह ने बताया कि सोमवार सुबह से मानसून की बारिश हो रही है। शाम तक बालाघाट सहित महाकौशल और मालवा के कुछ क्षेत्र में बारिश हुई। वहीं अगले 48 घंटे में रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, उज्जैन, आगर व इंदौर जिले में भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान इंदौर, जबलपुर, संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर भी बारिश हुई। मंडला, बालाघाट जिले सहित आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिन में 3 सेमी से ज्यादा बारिश हुई है। 
    मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून और आगे बढ़ गया है। यह सोमवार को मध्य महाराष्ट्र का कुछ हिस्से मराठवाड़ा का अधिकांश हिस्से और विदर्भ के कुछ भाग तथा उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में आगे बढ़ा है। अगले 24 घंटों में मानसून की अरब सागर ब्रांच भी मप्र पहुंच जाएगी, जिससे दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश के इलाके तरबतर हो सकते हैं। मौसम का कहना है कि जिन जिलों में 24 घंटे के अंदर बारिश हो सकती है उनमें उज्जैन, नीमच, रतलाम, शाजापुर, देवास, मंदसौर, आगर, इंदौर, धार, खंडवा, खरगौन, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, बुरहानपुर के अधिकांश क्षेत्र में। जबलपुर, मंडलवा, बालाघाट, नरसिंहपुर, सिवनी, कटनी, छिंदवाड़ा, उमरिया, अनूपपुर, शहडोल, डिंडौरी, होशंगाबाद, बैतूल, हरदा जिले के कुछ स्थानों पर बारिश व गरज चमक के साथ बौछारे पड़ने की संभावना है। वहीं रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह, छतरपुर, गुना, अशोक नगर में कहीं-कहीं बौछारे पड़ सकती है। मौसम विभाग की माने तो जिन तीन कारणों से तेज बारिश होगी उनमें एक हवा की ऊपरी भाग में चक्रवाती हवा का घेरा जो ऊंचाई के साथ दक्षिण पूर्व दिशा की ओर झुका हुआ है। यह समुद्र तटीय कर्नाटक और उसके आसपास 3.1 एवं 7 .6 किलोमीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। दूसरा कारण उत्तरी छत्तीसगढ़ में हवा की ऊपरी भाग में 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक चक्रवाती हवा का घेरा बना हुआ है जो ऊंचाई के साथ दक्षिण दिशा की ओर झुका हुआ है और तीसरा कारण एक द्रोणिका पश्चिमी राजस्थान से उत्तर बंगाल की खाड़ी तक समुद्र की सतह पर बना हुआ है। जो मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा से होकर गुजर गुजर रही है जो 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई तक बना हुआ है।

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