मोदी के विजन को भारत हितैषी मानते हैं बुद्धिजीवी

शिक्षाविद बालकृष्ण कुमावत से बातचीत में उभरी बातें
भोपाल। जब अर्थशास्त्र की किताबों की चर्चा शुरू होगी तो उज्जैन के इस वरिष्ठ शिक्षाविद बालकृष्ण कुमावत के नाम की चर्चा स्वभाविक है। लोकसभा चुनाव के वक्त उज्जैन उनके निवास पर जाने का सहज योग बन गया। कोई साक्षात्कार की बात नहीं थी। उनसे चर्चा और उनसे साक्षात मिलना ही बड़ा अनुभव रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही जो इस आलोचना के जामने में सहज नहीं थी। उनका कहना था कि उनका विजन भारत हितैषी है। क्यों? तब उनका कहना था कि हमारे देश ने आजादी के बाद कदमताल तो किया लेकिन अपनी संस्कृति के साथ कदमताल अब शुरू हुआ है। मोदी ने जीवन के प्रारंभ में तपस्या की है इसलिए वे विलक्ष्ण प्रतीभा के धनी हैं वे बहुत कुछ करने के लिए आये हैं और देश को उन्हें मौका दर मौका देना चाहिए।
लोकसभा चुनाव में जनता का मूढ़ जानने के लिए हम निकले थे। हमारी सहयोगी श्रीमती आभा निगम और योगेश निगम सारथी के रूप में साथ थे। उज्जैन के ग्रामीण मतदाताओं की भावना जानने के साथ महाकाल बाबा के दर्शन का लोभ मन में था। लेकिन बीच में सुप्रसिद्ध शिक्षाविद डा. बालकृष्ण कुमावत के यहां जाने का प्रोग्राम बन गया। उन्होंने बताया कि मोदी विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी हैं। एकाग्र हैं। आलोचनाओं से भी विचलित नहीं होते और अपने मिशन में जुटे रहते हैं। वे भारत के निर्माण के लिए पैदा हुये हैं ऐसा समझा जा सकता है। यह उनके द्वारा बचपन में की गई तपस्याओं का परिणाम है। हम उनकी आलोचनाओं में आखिर क्या पाते हैं? भ्रष्टाचार, देश से परे राजनीति के लिए काम करना, अपने परिवार को संपत्ति के लिए बंदरबांट? फिर क्या उनका विजन देश के लिए है? भारतीय संस्कृति के साथ देश का विकास उनका एजेंडा है। उनका विरोध वे लोग अधिक कर रहे हैं जिनकी विरासत लुटने का खतरा है।
उन्होंने कहा मुझे लगता है कि देश को उन्हें इस बार भी समय देना चाहिए और आगे भी। वस्तुत: भारत को किस दिशा में विकास करना यह निर्धारित करने में चूक हुई है। पहले भी विकास हुआ है। कोई इंकार नहीं कर सकता। लेकिन विकास के साथ हम संस्कृति को खोते चले गये। जिसे मोदी ने पटरी पर लाया है। वे भारत के यही मायने में निर्माता बनने जा रहे हैं। यही कारण है वे देश के प्रिय हैं।

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