‘मिशन’ मध्यप्रदेश का कब ऐलान करेंगे ‘कैलाश’

भोपाल। एक समाचार यह आ रहा है कि भाजपा के दो बागी विधायकों की भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात हो सकती है। अभी वे दिल्ली में डेरा जमाये हैं। इतनी ताकतवर पार्टी से कोई ऐसे ही बगावत तो नहीं कर सकता है। दो विधायक कांग्रेस के पाले में खड़े दिखाई दे रहे हैं और पार्टी के नेताओं का सपना अभी सरकार बनाने का है। जयपुर से भोपाल तक प्रदेश के दिग्गज नेता और बंगाल में अहंम भूमिका निभाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जयपुर में कहा कि अब मध्यप्रदेश मिशन शुरू होने जा रहा है। जयपुर में येदियुरप्पा के बहुमत सिद्ध करने के बाद मिशन मध्यप्रदेश शुरू होने की बात की गई थी लेकिन भोपाल में जब उन्होंने दोबारा बोला तो येदि बहुमत सिद्ध कर चुके थे। अब एक नई बात यह जोड़ी गई कि जब मिशन का ऐलान होगा तो सबके सामने कहा जायेगा कि मिशन शुरू। भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि गोवा की तरह चुपचाप सब हो जायेगा और कैलाश कह रहे हैं कि सब खुल्लम खुल्ला होगा। जिस तरीके से कमलनाथ भाजपईयों पर आरोप लगा रहे हैं। उनकी जांच शुरू करा रहे हैं तब ऐसा संदेश जाता है कि उन्हें उनके खुफिया तंत्र ने सचेत कर दिया कि भाजपा वाले अंदरखाने में काफी सक्रिय हैं।
कुछ बातों का तालमेल नहीं बैठ रहा है। गोपाल भार्गव ने सदन में बोला कि दम्बर वन व टू बोल दें तो शाम तक सरकार गिरा दें। क्या हवा में बोला गया था? शाम को भाजपा के दो विधायकों ने कमलनाथ सरकार का समर्थन करने की घोषणा कर दी। अब भाजपाई बगलें झांक रहे हैं। अब कैलाश विजयवर्गीय ने मिशन मध्यप्रदेश की बात की तो कमलनाथ ने मौन साध लिया। अब दिल्ली का संदेश कैलाश के माध्यम से है या फिर कार्यकर्ताओं का जोश बरकरार रखने के लिए ऐसे बयान दिये जा रहे हैं। सच यह है कि मध्यप्रदेश में शिवराज कमान छोडऩे को तैयार नहीं हैं और उनके विकल्प के रूप में किसी नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। दिल्ली से कोई आयेगा या फिर मध्यप्रदेश के नेता ही तैयार होंगे। या फिर शिवराज एक बार। तब तक मिशन मध्यप्रदेश का कोई औचित्य बनता नहीं है। हां एक बात जरूर हो गई। कमलनाथ ने अमित शाह और नरेन्द्र मोदी को चुनौती देकर उनकी प्राथमिकताओं को बदलवा दिया है। यही कारण है कि कमलनाथ ने विभिन्न प्रकार की जांच को शुरू कराने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। नरोत्तम के लिए ई-टेंडरिंग और शिवराज के लिए डम्फर। कैलाश के लिए पेंशन तो गोपाल के लिए गुड़ी गुड़ी।
भाजपा के नेता सन्नाटे में हैं। उनकी गांठ के दो चले गये। दिल्ली ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। एक कहावत है आ बैल मुझे मार। आज की राजनीतिक परिस्थितियों में कौन सा ऐसा नेता है जो मोदी-शाह की जोड़ी को चुनौती दे सकता है। कमलनाथ ने चुनौती देने का प्रयास किया है। इसी चुनौती के जवाब में कैलाश का बयान आया है। अच्छा एक और महत्वपूर्ण बात है। कमलनाथ के दो विधायक तोडऩे की घटना पर दिग्विजय सिंह चुप हैं। इसी चुप्पी में जबरदस्त संदेश छुपा हुआ है। वे तो जांच कराने की राजनीति पर भी मौन हैं। इसलिए दो पखवाड़े राजनीतिक घमासान के ही कहे जा सकते हैं।

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