मांग करो की राजनीति तेरी जय हो

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि। देश प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाई देने लग गया है। पहले राजनीति में राजनीतिक पार्टी के काम के आधार पर प्रत्याशियोंं के प्रति मतदाता का मानस बनता था। इसके बाद विकास के आधार तक बात टिकी। अब तो करो कुछ नहीं शोर करो की राजनीति हो गई है। कारोना काल की बात हो या फिर किसानों को राहत देने की मांग की राजनीति हो इसमें शोर अधिक मचाया जाता है सहयोग कम किया जाता है।

कोरोना महामारी में आज एक ही बात दिखाई दे रही है। केन्द्र की सरकार ने राज्यों की सरकारों के साथ मिलकर इस महामारी का वैश्विक शक्ति की भांति मुकाबला किया है। न केवल नुकसान कम होने दिया अपितु वैक्सीन समय के साथ और महाशक्तियों के साथ तैयार करने का गौरव भी हासिल किया है। आज देश में 150 करोड़ से अधिक डोज लगाये जा चुके हैं जो एक कीर्तिमान है। अब बात आती है विपक्ष की। कांग्रेस का कहना रहा है कि कोरोना को लेकर राहुल गांधी ने जिस प्रकार का सुझाव दिया था सरकार को उसी के हिसाब से काम करना पड़ा है। यदि वह पहले कर लेती तो इतना नुकसान नहीं होता।

राजनीति मांग (डिमांड) करने तक आकर रूक गई। राहुल गांधी ने भी कमोवेश वैसा ही किया। वैसे कांग्रेस की राजनीति मांग करो और आगे बढ़ो पर सिमटती जा रही है। राहुल गांधी के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों पत्रकारों के सामने अपना पक्ष रखा। मौका था पन्द्रह साल के बच्चों को वैक्सीन लगाने का। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और खासकर राहुल गांधी की मांग थी कि बच्चों को वैक्सीन लगाई जाये। केन्द्र सरकार ने मजबूर होकर इस मांग को माना है। अब हम मांग करते हैं कि इससे भी कम उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाने की सरकार मंजूरी दे। उन्होंने यह भी साथ में कह दिया कि वैक्सीन उत्पादन की स्थिति को देख कर सरकार को यह निर्णय लेना चाहिए और छोटे बच्चों को भी वैक्सीन लगाकर उन्हें कोरोना से सुरक्षित रखा जाये।

मतलब सबको पता है कि कोरोना वॉरियर्स और साठ साल के लोगों के बाद 45 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने का क्रम चला। इसके बाद पन्द्रह साल के बच्चों तक का नम्बर आ गया। अभी तक 150 करोड़ डोज वैक्सीन के देश में लगाये जा चुके हैं। रोजाना वैक्सीन लगाने की मुहिम चल रही है और अगला क्रम सबसे कम उम्र के बच्चों का ही है। यह भी सबको पता है कि छोटे बच्चों के लिए ट्रायल का काम पूरा हो चुका है। एक मुख्यमंत्री और सीनियर नेता को इसका पता होगा ही। इसलिए मांग कर लो पता है ही सरकार खुद ही इसे पूरा करने जा रही है।

अब बारी है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ की। मध्यप्रदेश में मौसम बिगड़ा। आलोवृष्टि हुई और तेज वर्षा के कारण फसलों को नुकसान हुआ। घटना रात की थी और सुबह उन्होंने टवीट करके सरकार से मांग कर डाली कि वह तत्काल इस नुकसान का सर्वे करवाये और किसानों को मुआवजा प्रदान करे। अपने डेढ साल के कार्यकाल में कभी खेत की ओर जाकर नुकसान को नहीं देखा और बारिश के चलते राहत की मांग कर डाली। जबकि सबको पता है कि सरकार सुबह ही ऐसी घोषणा करेगी ही। मांग करने की राजनीति तेरी जय हो।

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