मध्य प्रदेश में दो साल में 52 बाघों का शिकार

ताजा वारदात सतना जिले में हुई, तीन शिकार दबोचे 
भोपाल।
मध्यप्रदेश में पिछले दो साल में 52 बाघों की शिकार व अन्य कारणों से मौत हो चुकी है। 2017 में 28 वहीं 2018 में 24 बाघों की जान जा चुकी है। प्रदेश में अब 308 बाघ बचे हैं। हाल ही में सतना जिले की मझगवां वन रेंज की अमिरती बीट में शिकारियों ने करंट लगाकर तीन साल के एक बाघ का शिकार किया है। पुलिस ने तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि सांभर, चीतल जैसे छोटे जानवर के शिकार के लिए उन्होंने नाले में करंट फैलाया था। लेकिन बाघ की मौत हो गई। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने रविवार रात साढ़े 8 बजे नाले में करंट फैलाया था। रात तकरीबन सवा 11 बजे बाघ पानी पीने के लिए नाले पर पहुंचा। करंट लगते ही उसने जोर की दहाड़ मारी और वहीं पर गिर गया। दहाड़ से घबराकर शिकारी भाग गए।
 उधर, नर्सरी में मौजूद गश्ती चौकीदारों ने जब रात में सर्च शुरू की तो बाघ का शव नाले के पास मिला। सोमवार को सरभंगा नर्सरी में वन अधिकारियों की मौजूदगी में टाइगर का पोस्टमार्टम कराया गया। भीषण गर्मी में कारण इलाके के ज्यादातर नदी-नाले सूख चुके हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व की लाइफ लाइन केन नदी में सिर्फ चट्टानें नजर आ रही है। यही वजह है कि वन्य प्राणी अपनी प्यास बुझाने के लिए जानजोखिम डाल कर कई जंगलों से बाहर रिहायशी इलाकों में भी घुस आते हैं। ऐसी परिस्थिति में उनके साथ कोई दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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