मदिरा प्रदेश के खिलाफ भाजपा का हल्ला

शिवराज व गोपाल भार्गव ने अलग-अलग बोला हमला
भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] 
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों से बात करते हुये सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश को नशे की लत में नहीं धकेलें। वे विरोध के लिए विरोध नहीं कर रहे बल्कि यह प्रदेश के युवाओं व अन्य लोगों का सवाल है। दूसरी तरफ नेता विपक्ष गोपाल भार्गव ने भी प्रदेश को मदिरा प्रदेश ने बनने देने की बात कही। दोनों नेताओं के अलग-अलग आये बयानों में एक समानता है कि दोनों ही नेताओं ने सड़क पर उतर कर विरोध करने की बात कही है।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों को बुलाया और कहा कि वे विरोध करने के लिए नहीं कह रहे हैं। राज्य की आय बढ़ाने की बात हो सकती है। लेकिन यदि इससे प्रदेश में नशे की लत बढ़ रही है तब दुकानों को बढ़ाने का निर्णय सरकार को वापस लेना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार अपने निर्णय पर फिर से विचार करे। नहीं तो वे सड़कों पर इसका विरोध करेंगे। शिवराज ने मीडिया से भी अपील की कि वे इसमें साथ दें क्योंकि यह प्रदेश का विषय है किसी के विरोध का विषय नहीं है।
उन्होने कहा कि इससे बलात्कार जैसे अपराध होते हैं। यह निर्णय शराब माफिया के कहने पर हुआ है और दुकानों की संख्या दो से तीन गुणा हो जायेंगी। सरकार  शरा माफिया के माध्यम से खजाना भरना चाह रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आज पत्र लिखने जा रहे हैं। शिवराज ने कहा कि उन्हें प्रदेश के भविष्य की चिन्ता है। माता बहिनों की चिन्ता है इसलिए यह विषय अन्तरात्मा से उठा रहा हूं।
इधर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि सरकार गौशाला की  जगह मधुशाला खोल रही है। यदि यह निर्णय वापस नहीं हुआ तो सीएम हाउस का घेराव किया जायेगा। भार्गव ने कहा कि उप दुकानें खोलने का निर्णय वापस लेना चाहिए। कांग्रेस अपने वचन पत्र को भी ठेंगा दिखा रही है।

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