भाजपा के चक्रव्यूह में फंसी ममता

नई दिल्ली (विशेष प्रतिनिधि)। टीएमसी सुपीमों ममता बनर्जी नंदीग्राम के चुनावी दंगल में फंस गई हैं। उन्हें अपनी सीट की रक्षा करने के लिए पांच दिन से वहीं पर डेरा डालना पड़ रहा है। भाजपा का तगड़ा चक्रव्यूह भेदने में ममता बौखला गई हैं। वे धमकियों पर उतर आई हैं लेकिन जीत के प्रति आश्वस्त हैं। वहीं चुनाव समीक्षक मानते हैं कि ममता जिस जोश से गद्दार से बदला लेने आईं थी नंदीग्राम की जनता ने उस शुभेन्दु अधिकारी को हीरो बना दिया। भाजपा ने चुनाव प्रचार के अन्तिम दिन पूरी ताकत झौंक दी। खुद अमित शाह ने रोड़ शो किया तो जाने-माने फिल्मी सुपरस्टार मिथुन चक्रवर्ती ने शुभेन्दु के पक्ष में तगड़ा रोड़ शो किया है। हालांकि ममता दीदी भी व्हील चेयर पर बैठकर सड़कों पर आई और रोड़ शो किया लेकिन फीका शो बता रहा था कि चुनाव के परिणाम चाहे कुछ भी हों लेकिन ममता चक्रव्यूह में फंस गई हैं।

जो बात प्रत्याशी घोषित करते वक्त थी वह अब नहीं है। ममता बनर्जी ने एक बार में सारे प्रत्याशी घोषित कर दिये। खुद ने भी अपनी परम्परागत सीट भवानीपुर को छोड़ कर नंदीग्राम से प्रत्याशी बनना स्वीकार किया। यह नारा दिया कि गद्दार के सामने खुद लड़ूंगी और उसे सबक सिखाया जायेगा। पहले दिन ऐसा लग रहा था कि ममता के सामने कोई भी टिक नहीं पायेगा। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर है। नामांकन के दिन रोड़ शो में चोट लग गई। ममता ने चोट को भुनाने का खेला खेला। उसमें वे एक्सपोज हो गईं। बंगाल की जनता को पता चल गया कि जितना चोट को दिखाया जा रहा है उतनी नहीं है। इसके बाद भी वे प्लास्टर और व्हील चेयर के माध्यम से प्रचार करने निकल पड़ी। दो दिन में यह सहानुभूति भी खत्म हो गई। अब वे व्हील चेयर से उतर नहीं पा रही हैं और जनता के बीच जितनी सक्रियता की जरूरत थी उतने को पूरा नहीं कर पा रही हैं। मीडिया उनकी गतिविधियां दिखा रहा है जिससे यह समझ में आ रहा है कि वे खेला कर रही हैं।

इसका प्रभाव नंदीग्राम में पड़ा है। नंदीग्राम की जनता को समझने का मौका मिल गया कि वह नाटक का चुने या हमेशा सेवा के तत्पर रहने वाले अधिकारी परिवार के साथ आये। एक बार ममता आ सकती हैं लेकिन हर दिन तो साथ देंगे अधिकारी परिवार वाले ही। इसलिए स्थितियों में बदलाव हुआ है। ममता को इसकी भनक लग गई तो वे पांच दिन से नंदीग्राम में ही डेरा डाले हैं। प्रचार भी कर रही हैं और भाजपा के कार्यकर्ताओं को तोड़ भी रही हैं। लेकिन एक मामले ने उनके प्रयास को नकारने की खबर सामने ला दी जिससे उनकी छवि खासी प्रभावित हुई है। यह छवि उनको हार के करीब पहुंचा सकती है। अब यह दावा नहीं किया जा सकता है कि ममता की जीत एक तरफा है। उन्हें शुभेन्दु अधिकारी की कड़ी टक्कर मिल रही है। भाजपा की चुनावी रणनीति के सामने ममता घबरा गई है। उन्होंने ममता को उनके चुनाव क्षेत्र में घेर लिया है। वे प्रचार से भी वंचित रही हैं। इसलिए ममता को अन्य क्षेत्रों में भी नुकसान का आंकलन बताया जा रहा है।

अब भाजपा ने अन्तिम दिन पूरी ताकत इस नंदीग्राम क्षेत्र के लिए झौंक दी है। घर-घर प्रचार से पहले रोड़ शो हुये हैं। मिथुन चक्रवर्ती ने रोड़ शो किया तो ममता ने कहा कि वे कोबरा को कभी माफ नहीं करेंगी। जबकि अमित शाह के रोड़ में उमड़ी भारी भीड़ ने ममता की हवा सरका दी है। ममता का बयान आया कि केन्द्रीय बलों को यहां तैनात करके मतदाताओं को धमकाया जा रहा है। लेकिन इसे हार की खीज से अधिक कुछ नहीं कहा जा रहा है। क्योंकि सवाल यह पूछा गया कि केन्द्रीय बलों को यह कैसे मालूम चल रहा है कि कौन मतदाता भाजपा का है और कौन तृणमूल का है? इसलिए ममता एक्सपोज हो रही हैं और यह चुनाव परिणाम का पूर्वाभाष बताया जा सकता है। परिणाम जो भी आये आने वाले चरणों के लिए ममता को अधिक जोर लगाना पड़ेगा यह जरूर बताया जा रहा है।

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