‘बंगाल’ के बाद कई कदम आगे निकल गये ‘कैलाश’

भोपाल। वो दिन याद है जब प्रदेश के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय को हरियाणा की कमान दी गई थी। तब हरियाणा में भाजपा का अपना न तो कोई प्रभावशाली संगठन था और न ही अधिक विधायकों की संभावना। कुल जमा 11 विधायक कभी सबसे अधिक रहे थे। कैलाश जी ने बात की और आत्मविश्वास से कहा कि हम हरियाणा में सरकार बनायेंगे। आखिर हुआ भी वही हरियाणा में भाजपा की अपने दम पर सरकार बनी और आज वहां प्रतिष्ठित सरकार मानी जा रही है। जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं और नौकरियों में पारदश्रिता और बिना लेन-देन की चर्चा हो रही है। कैलाश जी ने अगला कदम बढ़ाया पश्चिम बंगाल की ओर। किसको पता था कि वहां पर कैलाश की छवि इतनी बड़ी हो जायेगी। लोकसभा चुनाव के वक्त ममता की आतंकराज और वहां डटकर मुकाबला करने का दम दिखाकर कैलाश विजयवर्गीय ने अपने को राजनीतिक रूप से ताकतवर सिद्ध कर दिया। वे किसी भी जोखिम को उठाने वाले नेता, दबंग नेता और कार्यकर्ताओं के लिए कुछ भी करने वाले नेता बनकर सामने आये हैं। प्रदेश में भाजपा के दिग्गज नेताओं में कार्यकर्ता कंधे पर चढ़ाने के लिए काम आता है इस भावना से आगे चलते हैं और कार्यकर्ता को उसक हाल पर छोड़ते चलते हैं। लेकिन कैलाश जी ऐसी राजनीति नहीं करते। उनके कदम कार्यकर्ता को देखकर रूक जाते हैं।
कैलाश विजयवर्गीय ने जब प्रदेश की राजनीति से दिल्ली जाने का मन बनाया तब उनके शुभचिन्तकों को लगा था कि यह कदम सही है भी या नहीं। लेकिन अमित शाह का साथ और पुराने संबंधों ने साथ दिया। पहले हरियाणा की सफलता मिली और अब बंगाल नई सफलता के साथ ऊंचाई देने जा रहा है। गजब का प्रबंधन है। लोगों में विश्वास होता है कि कैलाश जी हैं तो। मालवा में कैलाश जी का नाम ले लो वो ही काफी है। जनता का समर्थन मिलने लग जायेगा। ऐसा जादू अब बंगाल में चला। वहां राजनीतिक वातावरण सामान्य नहीं था इसलिए जोखिम अधिक था। चुनाव बीच में आतंक के सहारे चला गया। हर चुनाव में हिंसा ने तांडव मचाना शुरू कर दिया। लेकिन कैलाश जी अडिग रहे और अपने कार्यकर्ताओं को ताकत देते रहे। बंगाल की जनता को यह समझाने में कामयाब हो गये कि जिस आतंक को समाप्त करने के लिए ममता दीदी का साथ आपने दिया था दीदी भी उसी आतंक के सहारे खड़ी हें। यदि आतंक को बाय-बाय करना है तब भाजपा के साथ आईये। हम आतंक से भी नहीं डरते लेकिन आतंक के साथ राजनीति नहीं करते।
कैलाश जी की राजनीतिक ऊंचाई अब इतनी हो गई है कि प्रदेश के अधिकांश नेताओं से आगे निकल गये हैं। प्रदेश की सरकार को लेकर उनका बयान मायने रखता है और यह भी सवाल खड़ा करता है कि यदि उनके बयान का फलीकरण होता है तब प्रदेश सरकार की कमान कौन संभालेगा? इस उत्तर को खोजने में अधिक समय नहीं लगने वाला है। फिर भी इसे अभी छोड़ते हैं। लेकिन यह मानने के लिए हमें अनेकों लोग मिले हैं कि कैलाश जी ने बंगाल के बाद राजनीतिक रूप से ऊंची छलांग लगाई है जिसका लाभ उन्हें भी मिलेगा और इसका लाभ प्रदेश को भी मिल सकता है। जो चार महीने से बहक सा रहा है।

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