‘प्रह्लाद’ पटेल के जन्मदिन पर डिनर ‘डिप्लोमेसी’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का आज जन्मदिन है। वे 62वें साल में प्रवेश कर रहे

सुरेश शर्मा

हैं। लेकिन उनके निवास पर तीन दिग्गज नेताओं का पूर्व संध्या पर ही जमावड़ा होने की राजनीतिक चर्चा समाचार पत्रों में सुर्खियां पा रही है। कोई राजनीतिक मन्तव्य होगा इसकी हवा इसलिए निकल सकती है क्योंकि छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल उस डिनर आयोजन में शामिल थे। लेकिन केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल के घर पर शाम को अग्रवाल से पहले ही पहुंच गये थे। तीनों नेताओं ने अकेले में बात की। यह तो कोई भी नहीं मान सकता है कि तीन नेता यहां मौसम की बात करने मिले होंगे? यदि मिलने का कारण जन्मदिन है तब पूर्व संध्या की जरूरत क्या थी आज मिलते? इसलिए इसे डिनर डिप्लोमेसी कहने की जरूरत महसूस हो रही है। पटेल साहब ने इससे पहले भी विजयवर्गीय को भोपाल में भोजन कराकर तब की सुर्खियों में अपना नाम जोड़ लिया था। हालांकि उस समय यह सफाई आई थी कि कैलाश जी को आना था उसी दिन उनका जन्मदिन था इसलिए मुलाकात भोजन के साथ हो गई। लेकिन आज की खबर का कोई न कोई बहाना तो होगी ही।

प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में इस बात पर खूब जोर दिया गया था कि प्रदेश के संगठन और सरकार के स्थयित्व को लेकर कोई संकट नहीं है। लेकिन समाचार उसी दिन आ गया कि प्रदेश के दिग्गज नेता जो केन्द्र की राजनीति या केन्द्र की सरकार में शामिल हैं वे पार्टी प्रमुख जगत प्रकाश नड्डा के साथ दिल्ली में मंचासीन थे। जबकि प्रदेश का काम देखने वाले मुख्यमंत्री शिवराज और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के साथ भोपाल में विराजित थे। यह विभाजन भी कहा जा सकता है और विरोध का नियंत्रण भी। यदि दिल्ली में पार्टी प्रमुख के साथ बैठे नेता भोपाल में होते तो सवाल जवाब भी कर सकते थे, अब तो भाषण तक ही सीमित रहे। इसके बाद शिवप्रकाश हों या मुरलीधर राव सबने शिवराज को एक मात्र नेता बताया और चेता दिया कि सब अपनी हद में रहें। जन्मदिन के आयोजन को कोई भी हद की सीमा में नहीं ले सकता है। इसलिए यह डिनर डिप्लोमेसी प्रदेश की राजनीति को फिर से गर्माने का प्रयास तो हो ही सकती है। इस बारे में नजदीकी और जानकार कह रहे हैं कि यह घटना सहज है। लेकिन यदि सहज घटना होती तो इस प्रकार का फोटो सेशन नहीं होता और मीडिया की सुर्खियां भी नहीं बनता।

मध्यप्रदेश वैक्सीन लगाने का रिकार्ड बनाने में लगा है तो कहीं पर राजनीतिक बदलाव का रिकार्ड बज रहा है। सभी पक्ष आशंकाओं की खबरों को खारिज कर रहे हैं। पहले चली मेल-मुलाकात की स्थिति ने खबरों का जायका बदल दिया था। संगठन को कहना पड़ा कि सोशल मीडिया की खबरों के आधार पर मुख्यमंत्री को बदला नहीं जा सकता है। मतलब बदलने में मुख्यमंत्री का नाम बोलने की क्या जरूरत थी? इसी जरूरत ने जन्मदिन से पहले भोजन पर नेताओं को एक साथ एकत्र होने की प्ररेणा दे दी। अब मायने तो निकालने का काम खबरचियों का है ही? मायने सही निकलेंगे या पहले की भांति हवाई रहेंगे इसे देखते हैं।

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