प्रदेश में विधायकों की पूछपरख बढ़ी – कांग्रेस-भाजपा करेंगे विधायकों की गिनती

भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि] जब से दो विधायकों को अपने पाले में कांग्रेस ने खड़ा करके दिखाया है भाजपा हलकान है। वह प्रतिघात करने की योजना भी बना रही है और अपना घर भी संभाले रखना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने मघुमक्खी के छाते में हाथ तो डाल लिया है लेकिन उसे भी अब काटे जाने का डर सता रहा है। इसलिए अब दोनों ही दल अपने विधायकों की समय-समय पर गिनती करते रहेंगे। भाजपा ने एक अगस्त को अपने विधायकों को प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुलाया है। उनके साथ सदस्यता और संगठन के पदाधिकारी भी होंगे। जबकि कांग्रेस 5 अगस्त को अपने विधायकों को भोपाल बुला रही है। कमलनाथ सरकार ने जितनी बार विधायक दल की बैठक बुलाई है उतनी किसी अन्य मुख्यमंत्री ने नहीं बुलाई है। इसी बीच यह भी जानकारी मिली है कि भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इस बैठक में शामिल होने भोपाल आ सकते हैं। कार्यालय उनके आने की पुष्टि नहीं कर रहा है।
भाजपा ज्यादा खतरा महसूस कर रही है। उसके दो विधायक पाला बदल चुके हैं। उन्हें पार्टी ने अपनी शैली में समझा दिया है। इसलिए अब यह संभावना कम है कि कांग्रेस अपनी संख्या को कुछ अधिक बढ़ा पायेगी। अब पलटवार हो सकता है। इसलिए 5 को विधायक दल की बैठक आहुल हो सकती है। इसमें विधायकों को एकजुट रखने के फार्मूल पर बात हो सकती है। मंत्री विधायकों को संभालेंगे। किसी की कुछ भी बात मानी जा सकती है। छूट भी दी जा सकती है। कमलनाथ काफी सत्र्तक हो गये हैं।
भाजपा ने अपनी बैठक सदस्यता अभियान के कारण बुलाई है। इसमें पदाधिकारी, विधायक, सदस्यता प्रभारी, जिले के अध्यक्ष,  अपील समिति, मोर्चा, प्रकोष्ट व विभाग के प्रमुखों को बुलाया गया है। भाजपा कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि कार्यकारी अध्यक्ष नड्डा आ रहे हैं। लेकिन यह जानकारी मिल रही है कि नड्डा बागियों से भोपाल में मिलेंगे और अन्य विधायकों की गिनती भी करेंगे। पदाधिकारियों से भी बात करेंगे कि आखिर सरकार गिराने के मामले में अपनी योजना में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? यह भी कहा जायेगा कि केन्द्रीय संगठन से तालमेल करके ही बयान दिये जायें। भाजपा की इस योजना के बाद ही कांग्रेस ने भी विधायक दल की बैठक बुलाने का मन बनाया है। हालंकि इसकी अधिकृत घोषणा अभी नहीं हो पाई जो बाद में होगी।
भाजपाई करेंगे सरकार गिराने का शंखनाद
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा के दो विधायकों को अपने साथ मतदान के लिए खड़ा करके यह प्रचारित करने का प्रयास किया कि ये विधायक उनके साथ आ गये हैं। कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में स्वभाविक है कि उन्हें उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। बिना व्हिप के समर्थन देने के कारण उनकी सदस्यता को कोई खतरा नहीं है। दूसरी तरफ भाजपा ने यह प्रचारित करके अपने ऊपर आ रही समस्या को दिल्ली की ओर मोड़ दिया कि कमलनाथ ने कर्नाटक का बदला लिया है। इसके बाद दिल्ली के कान खड़े हो गये। यदि कमलनाथ संजय पाठक और अन्य शराब माफिया विधायकों को प्रशासन के दम पर अपने पाले में लाने का प्रयास कर सकते हैं तो गुजराती बंधु इस प्रकार के खेल में उनसे अधिक निपुण हैं। यही कारण है कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने प्रदेश से बाहर मध्यप्रदेश मिशन की घोषणा की है। उसे भोपाल में दोहराया भी गया है। ऐसे में अब मध्यप्रदेश में शह-मात का खेल शुरू हो गया है। ऐसा नहीं है कि कमलनाथ ने बिना समझे यह गेम खेला है। इसलिए रौचक मैच होने की संभावना से कोई इंकार नहीं कर रहा है।

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