प्रजेंटेशन और वोट का समीकरण बिगड़ा तो हटे राजौरा

अजाक्स फलदायी नहीं हुआ तो हटा दिये गये कन्सोटिया भी
भोपाल। [विशेष प्रतिनिधि]
आज का दिन मंत्रालयस के गलियारों में दो ही चर्चाएं तेज रही। पहली यह कि अपने प्रजंटेशन के माध्यम से चर्चित रहने वाले अधिकारियों को पोल खुलने लग गई है। कृषि ऋण माफी में कमलनाथ सरकार की किरकिरी करवाने और लोकसभा के चुनाव में वोट का बड़ा नुकसान होने के कारण प्रमुख सचिव कृषि राजेश राजौरा से कृषि विभाग छीन लिया गया। दूसरी चर्चा यह है कि अजाक्स के अध्यक्ष और महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जे एन कन्सोटिया को भी एससीएसटी वोट कांग्रेस के पाले में नहीं करवाने की सजा मिली है। उन्हें भी इस मलाईदार विभाग से हटा दिया है। राजौरा को लेकर हमेशा यह कहा जाता रहा है कि वे कृषि कर्मण अवार्ड दिलवाने के मास्टर माइंड माने जाते हैं।
भाजपा कार्यालय में किसानों को लेकर प्रजेंटेशन देने के लिए चर्चा में आये राजेश राजौरा कमलनाथ की सरकार बनने से पहले ही कर्जमाफी का खाका बनाकर बैठ गये थे। उन्होंने परिणाम से पहले ही बैठक आहुत कर ली थी। जब नाथ सरकार ने शपथ ली तो पहली फाइन कर्जमाफी की राजौरा साहब की थी। लेकिन इस कर्जमाफी ने कमलनाथ सरकार की इतनी किरकिरी कराई कि विधानसभा जीतने वाली कांग्रेस लोकसभा में साफ हो गई। किसान खुलकर सरकार कि विरोध में बोल रहा है। चुनाव खत्म हुये आचार संहिता हटी तो सबसे पहला निशाना राजेश राजौरा को ही बनाया गया। उनसे कृषि विभाग छीन लिया गया। किसानों का ऋण माफ करने का तौरतरीका किसानों को पसंद नहीं आया और प्रजेंटेशन और वोट का समीकरण बदल गया।
अजाक्स के अध्यक्ष जे एन कन्सोटिया को लेकर भी इसी प्रकार की चर्चा चल रही हैं। मत्रांलय के गलियारों में कहा जा रहा है कि उन्होंने सरकार को आश्वस्त किया था कि अजाक्स के अधिकारी कर्मचारी सरकार के साथ होंगे जिससे समाज के वोट कांग्रेस के पक्ष में आ सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। मोदी के कारण अधिकांश वोट भाजपा के पक्ष में चले गये। चुनाव परिणाम में कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया। जैसा की कमलनाथ के सरकार को लेकर अवधारणा बन रही है कि वह बदले की कार्यवाही करने में देरी नहीं करती है इसलिए राजौरा को भी हटा दिया गया और कन्सोटिया को भी। अब किसानों का क्या होगा उस पर सबकी नजर टिकी है?

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