‘ध्यान’ आया तो ध्यानचंद के नाम हो गया खेल ‘पुरूस्कार’

भोपाल (सुरेश शर्मा)। राजीव गांधी ने कभी हॉकी का स्टिक नहीं पकड़ा, न बल्ला थामा और न ही बॉल को, इसके बाद भी खेलरत्न पुरूस्कार उनके नाम से हो गया। एक परिवार का राज था जो चाहा सो किया। इस देश में जितने भी संस्थान हैं घूम फिर कर एक ही परिवार के नाम पर कर दिये गये। आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले अन्य महापुरूषों की अनदेखी के आरोप तो लगते ही रहे हैं। लेकिन जब किसी अन्य विचारधारा को राज करने का मौका ही नहीं मिला तब इस बारे में सोचा भी कैसे जाएगा? पिछले सात वर्षों से नरेन्द्र मोदी की सरकार है इसलिए उन्होंने कुछ बुनियादी बदलाव किये हैं। उन बदलावों का राजनीतिक विरोध हो सकता है लेकिन न तो जन विरोध हो सकता है और न ही नैतिक विरोध ही। अब नया विषय उस समय सामने आया जब हॉकी 41 साल बाद कोई मैडल लेकर आ रही है। महिला हॉकी ने ऐसा खेला कि सबको गर्व की अनुभूति हो रही है। मैडल नहीं आया तो क्या मैडल से कम का खेल भी नहीं था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभिभावक के रूप में दोनों हॉकी टीमों से फोन करके बात की। यहां उड़ीसा के मुख्यमंत्री को कौन भुला सकता है जिन्होंने हॉकी टीम का खर्चा उठाया? मतलब प्रायोजित किया। मोदी ने तो एक तोहफा भी हॉकी को दे दिया। खेलरत्न हॉकी खिलाड़ी के नाम पर करके।

हॉकी ने फिर विश्व में अपनी धाक जमाई। एक मैडल जीता और महिला टीम ने मैडल जीतने जैसा प्रयास किया। सबको गर्व है। प्रधानमंत्री ने बात की और बाद में टवीट भी कर दिया। अब से भारत का सर्वोच्च खेल पुरूस्कार खेलरत्न मेजर ध्यान सिंह के नाम से जाना जायेगा। कोई विरोध करने की स्थिति में नहीं था। कांग्रेस को पता था कि उसने अपने राज में इसे राजीव गांधी के नाम पर किया था जिनका खेल से कभी वास्ता नहीं रहा। इसलिए वे कह रहे हैं कि ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए। फिर वही बात एक पायलट से प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी को भारत रत्न दे दिया गया लेकिन अपने राज में कांग्रेस ने परिवार से बाहर कहां सोचा? चाहते तो अन्य महापुरूषों को भारत रत्न दे सकते थे। अब खीज छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार ने भारत की व्यवस्थाओं में बेसिक बदलाव किये हैं। काम करने का तरीका बदला है। अर्थव्यवस्था का भारतीयकरण किया है। सुरक्षा का स्वाभिमान पैदा किया है। कश्मीर को मिलाकर देश का एकीकरण किया है। एक परिवार का भारत बंधन न हो इसकी व्यवस्था भी की है। कोई विरोध नहीं कर पा रहा है।

हॉकी के जादूगर के नाम से प्रसिद्ध मेजर ध्यानचंद का योगदान हॉकी को वैश्विक स्तर पर ले जाने में काफी रहा है। वे भारत में हॉकी के प्रणेता माने जाते हैं। इसलिए उनको भारत रत्न देने की मांग हर बार उठती है। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान दिया। वे इसके हकदार हैं लेकिन अन्य प्रतिभाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए था। अब खेल रत्न पुरूस्कार पर मेजर ध्यानचंद का नाम अंकित होगा तो इससे और गर्व होगा। नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार से खेल को प्रोत्साहित किया और अब खेल के वक्त उनका हौसला बढ़ा रहे हैं यह संदेश जाता है कि भारत चहुंमुखी प्रगति कर रहा है। मुखिया को संपूर्ण दिखना चाहिए। चलो परिवार से इतर किसी ने तो सोचा?

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