दिग्विजय के मेंनेजमेंट को मिली चुनौती

साध्वी की जीत की आस से कांग्रेस में मायूसी
भोपाल। विशेष प्रतिनिधि

चुनाव प्रबंधन के सबसे बड़े मास्टर दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लडऩे में पसीने आ गये। उनके प्रबंधन को इ तनी बड़ी चुनौती मिली है कि उनकी टीम निराश है। वह साध्वी की जीत की संभावना को खारिज नहीं कर रही है। यह माना जा रहा है कि उनके बयान और हिन्दू आतंकवाद शब्द निर्माण में सहभागिता ने उन्हें हार के करीब ला दिया है।
साध्वी को लेकर भाजप नेताओं में बड़ा उत्साह नहीं था। यदि वे जीतती हैं तब सीधे जनता के वोटों की भागीदारी होगी भाजप नेताओं ने वोट दिलाये हैं ऐसा कुछ नहीं होगा। विधानसभा के चुनाव में जिले के नेताओं के खिलाफ मतदान हुआ था जिसे भाजपा का वोट भी कम हुआ था और मध्य और दक्षिण पश्चिम सीट भी कांग्रेस के खाते में चली गई थी। लेकिन वह वोट दिग्विजय सिंह को चला जायेगा यह कोई भी मानने को तैयार नहीं है।
भोपाल में दिग्विजय सिंह ने बेहतर समीकरण जमाये थे। जातियों, संस्थाओं के साथ उन्होंने प्रबंधन फिट किया था। लेकिन क्षेत्रों के मतदाताओं ने संस्था प्रमुखों को भाव नहीं दिया। साध्वी को भी वोट नहीं दिया बल्कि हिन्दू आतंकवाद शब्द के सजृन करने में दिग्विजय की भूमिका का प्रचार होने का खामियाजा उन्हें मिला और वोट भाजपा से छटके नहीं।
भाजपा के पक्ष में जाने वाली सीटों में गोङ्क्षवदपुरा, सीहोर और बेरसिया हैं। बेरसिया में कम बढ़त मिलेगा जबकि सीहोर में अधिक। हुजुर भी भाजपा का लीड का बढ़ायेगा। उत्तर में भाजपा को गच्चा लेगा और नरेला में कांग्रेस का पक्ष मजबूत रहने की धारणा है। मध्य में बराबरी जैसी स्थिति रहेगी या कांग्रेस को लीड मिलेगी। जिस सीट से पीसी शर्मा जीत कर आये हैं वहां कांग्रेस के वोट नहीं हैं। वहां उमाशंकर से नाराजगी का लाभ पीसी को मिला था जो दिग्विजय को नहीं मिल पा रहा है।

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