दिग्गी के बयानों से कांग्रेस को लाभ है या हानि

भोपाल। विशेष प्रतिनिधि। प्रदेश कांग्रेस के नेता हालांकि खुलकर तो इस बारे में नहीं बोल रहे हैं लेकिन यह जरूर मान रहे हैं कि दिग्विजय सिंह के टवीट और बयान कांग्रेस को राजनीतिक लाभ तो नहीं पहुंचा रहे हैं हां, हानि जरूर उससे हो रही है। लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे? भाजपा के लिए राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह दोनों जब भी बोलते हैं उससे सीधा राजनीतिक लाभ होता है। संघ को लेकर निशाना साधने पर भी भाजपा को लाभ मिलता है।

दिग्विजय सिंह आए दिन टवीट करते हैं। उनके टवीट तत्काल मीडिया में चर्चा में आ जाते हैं। कई बार तो लगता है कि मीडिया पर्सन कुछ नेताओं के टवीट का इंतजार ही करते हैं। दिग्विजय सिंह ने भाईचारा वाली बात की तो विवाद उठ खड़ा हुआ। तालिबान की संघ से तुलना करने पर तो बवाल ही कट गया। इस प्रकार के बयानों की दिग्विजयी मानसिकता से जोड़ देखा गया। लेकिन दिग्विजय के हमले समान रफ्तार से चलते रहते हैं।

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि दिग्विजय सिंह का संघ पर निशाना साधने का असर कांग्रेस के पक्ष में कितना पड़ता इसका कोई पैमाना नहीं है। यूपी के मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के साथ नहीं आ पाते क्योंकि वहां विकल्प हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली मतलब मुस्लिम मतदाता टीएमसी के साथ चला गया और कांग्रेस खाली हाथ रह गई। इससे उलट हिन्दू मतदाता को यह लगने लग गया कि दिग्विजय सिंह संघ की आड़ लेकर हिन्दू समाज का विरोध करते हैं। इस अवधारणा को नकारने का प्रयास भी होता है लेकिन जब दिग्विजय सिंह राजधानी से लोकसभा का चुनाव साध्वी प्रज्ञा से हार गये तब इसका मतलब यही निकाला जा रहा है। प्रज्ञा ठाकुर वही हैं जिनको हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी में प्रयोग किया गया था और गृह विभाग के एक अधिकारी आरवीएस मणि ने अपनी किताब में इसका विस्तार से वर्णन किया है।

दिग्विजय सिंह के टवीट और बयान एक ही दिशा के होते हैं इसलिए आम जनता उसे देखकर छोड़ देती है। उसकी टिप्पणी होती है दिग्विजय हैं ऐसा ही बोलेंगे? कांग्रेस के नेता आफ द रिकार्ड तो यह बोल देते हैं कि बड़ा नुकसान कांग्रेस का होता है लेकिन सामने आकर कोई बोलना नहीं चाहता है। दिग्विजय समर्थक एक पुराने नेता बोले मंहगाई से जितना नुकसान भाजपा को होता है दिग्विजय का बयान उसकी भरपाई कर देता है लेकिन उन्होंने कह दिया बाद मतें बात करता हूं। मतलब केन्द्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद भी दिग्विजय पथ बरकरार होने का अर्थ पता नहीं चला।

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